मंगलवार, 16 अगस्त 2016

=१३४=

#daduji
卐 सत्यराम सा 卐
विरह अग्नि तन जालिये, ज्ञान अग्नि दौं लाइ ।
दादू नखशिख परजलै, तब राम बुझावै आइ ॥
विरह अग्नि में जालिबा, दरशन के तांईं ।
दादू आतुर रोइबा, दूजा कुछ नांहिं ॥
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साभार ~ Awes NIRAJ(via G+)
"ना किसी मंत्र की आवश्यकता है, 

ना जप की, न मूर्तिपूजन ना ही यज्ञ की।"
एक जल में डूबता व्यक्ति अपने प्राण
बचने हेतु जितना तत्पर रहता है वही
तत्परता ही पर्याप्त है उसकी प्राप्ति के लिए…!!

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