गुरुवार, 11 अगस्त 2016

= विन्दु (२)८२ =

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*#श्रीदादूचरितामृत*, *"श्री दादू चरितामृत(भाग-२)"*
*लेखक ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ।*
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*= विन्दु ८२ =*
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*= दांतुन की इमली =*
फिर दादूजी ने यह सोचकर कि - हरा वृक्ष तोड़ा तो गया, अब इस को सफल बनाना ही चाहिये । दादूजी ने दांतुन किया और उसे बिना चीरे ही भूमि में रोप कर अपने कंमडलु का पानी उस में डाल दिया । फिर दूजनजी उस में प्रतिदिन पानी डालते रहे । इससे वह हरा होकर इमली का वृक्ष बन गया । वह दांतुन की इमली अद्यापि विद्यमान है । दीपमालिका के दिन उसका मेला भरता है । आस पास की जनता उसे बड़ी श्रद्धा से पूजती है । प्रतिदिन धूप-दीप किया जाता है ।
ईडवा में दादूजी के ये मुख्य भक्त थे -
१- नरवद - इन्होंने राज्य को त्याग कर भक्ती की थी -
नरवद रहैं ईडवे थाना, राज सु तजै भजै भगवाना ।
स्वामीजी को दर्शन पायो, भक्ति कर बहु प्रेम बढ़ायो ॥३५॥
(वि. ११ जनगोपाल)
२ - रूपा
३ - जीता
४ - वैरागी लक्ष्मण भन्डारी यह दादूजी के लिये रसोई करता था अच्छा भक्त था
५ - रायमल
६ - दूजनदास
७ - कान्हड़जी भूतड़ा
८ - मनीषा
९ - लाखां बाई
१० - नरवद के पुत्र बग्घा
११ - हेमा ।
(क्रमशः)

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