सोमवार, 24 अप्रैल 2017

= विन्दु (२)९८ =

॥ दादूराम सत्यराम ॥
*श्री दादू चरितामृत(भाग-२)* 
लेखक ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥
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*= विन्दु ९८ =*
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*= ब्रह्मलीन होने की स्थिति का ज्ञान =* 
नारायणा दादू धाम में दादूजी महाराज के ब्रह्मलीन होने की स्थिति जानकर पीपाजी ने तत्काल पास बैठे हुये गरीबदासजी तथा मसकीनदासजी को कहा । उस समय बड़े गोपालजी एवं नारायणदासजी भी आकर खड़े हो गये थे । मन को दृढ़ रखने वाले दुर्गाजी, दयालदासजी, रज्जबजी भी तत्काल आ गये थे । उक्त संतों को गमन समय दर्शन हो गया । फिर अतिशीघ्र ही नारायणा नरेश को अपने सेवकों द्वारा ज्ञात हो गया । उसने आसपास के सब ग्रामों को सूचना देने की आज्ञा अपने मंत्री कपूरचंद को दे दी । कपूरचंद ने नारायणा के आसपास सभी ग्रामों को दादूजी महाराज के ब्रह्मलीन होने की सूचना भेज दी । 
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इधर गरीबदासजी आदि संतों ने टीलाजी को बुलाने के लिये शीघ्रग्रामी दूत का प्रबन्ध राजा नारायणसिंह को कह कर करा दिया । जिससे टीलाजी और जगन्नाथजी भी अन्त्येष्टि संस्कार होने तक आ जायें । और वहां उपस्थित दादूजी महाराज के शिष्य तथा नारायणा नरेश नारायणसिंह आदि ने मिल कर दादूजी महाराज के स्थान पर गरीबदासजी को मान लिया । सबने एक स्वर से स्वीकार कर लिया कि दादूजी महाराज की गद्दी पर गरीबदासजी ही विराजने चाहिये । हम सब गरीबदासजी की आज्ञा में रहैंगे ।
*= अन्तिम दर्शनार्थ जनता का आना =*
फिर शिष्यों संतों ने दादूजी महाराज के शरीर को विधि पूर्वक स्नान कराया । फिर ईश्वर नाम उच्चारण करते हुये परम श्रद्धा पूर्वक अपने हाथों में उठाकर देव प्रेषित पालकी में बैठा दिया और विधि पूर्वक पूजा की । इतने में ही नारायणा नगर की भक्त जनता भी आ गई और अति श्रद्धा से भक्त लोग दादूजी महाराज के पवित्र शरीर की अन्तिम पूजा करने लगे फिर अति स्नेह से आरती उतारी । इसी समय दादूजी महाराज के शिष्य गरीबदासजी ने जनता को कहा - सज्जनों ! दादूजी महाराज की हम लोगों को आज्ञा है कि - “मेरे शरीर को भैराणा पर्वत की गुफा के पास दक्षिण की खोल में रख देना ।” अतः गुरुदेवजी की आज्ञा के अनुसार ही अब हम शीघ्र ही यहां से हरिनाम संकीर्तन तथा हरि यशगान करते हुये भैराणा पर्वत पर जायेंगे । 
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यद्यपि ग्रीष्म ऋतु का ज्येष्ठ मास है किन्तु आप लोग देख ही रहैं कि नभ में बादल छा गये हैं । अतः हमको धूप जन्य कष्ट तो नहीं होगा । जो सज्जन संकीर्तन करने वाले हैं वे अवश्य लाभ उठायें । तथा सर्व साधारण जनता के लोग भी हरि नाम संकीर्तन करते हुये भैराणा चल सकते हैं । स्थान - स्थान पर जल का प्रबन्ध नारायणा नरेश नारायणसिंहजी ने तथा आकोदा के नरेश केशोदासजी ने करने की स्वीकृति दे दी है । चलने वालों को कष्ट नहीं होगा । ब्रह्म स्वरूप दादूजी महाराज की महा प्रयाण यात्रा में कष्ट होने का तो कोई भी कारण नहीं है । 
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मार्ग के साफ़ करने का कार्य आरंभ हो गया है । जहां - जहां मार्ग में कंटक आदि होंगे वे हमारी यह पालकी पहुँचने से पूर्व ही साफ कर दिये जायेंगे । यद्यपि दादूजी महाराज की महाप्रयाण यात्रा के लिये पहले ही हजारों भक्त तैयार थे । गरीबदासजी के उक्त वचन सुनकर और भी हजारों भक्त भैराणा यात्रा के लिये तैयार हो गए । उक्त प्रकार सब व्यवस्था हो गई । 
(क्रमशः)

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