🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏 *श्री दादूदयालवे नमः ॥* 🙏
🌷 *#श्रीसुन्दर०ग्रंथावली* 🌷
रचियता ~ *स्वामी सुन्दरदासजी महाराज*
संपादक, संशोधक तथा अनुवादक ~ स्वामी द्वारिकादासशास्त्री
साभार ~ श्री दादूदयालु शोध संस्थान,
अध्यक्ष ~ गुरुवर्य महमंडलेश्वर संत श्री १०८ स्वामी क्षमारामजी महाराज
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*= ब्रह्मस्तोत्र अष्टक(ग्रन्थ २३) =*
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*न छाया न माया न देशो न कालो ।*
*न जाग्रन्न स्वप्नं न वृद्धो न बालो ।*
*न ह्रस्व न दीर्घ न रम्यं अरम्यं ।*
*नमस्ते नमस्ते नमस्ते अग्म्यं ॥५॥*
आप अशरीरी हैं, अतः छाया रहित हैं, माया(वासना) रहित हैं । न आप देश-काल की व्यवस्था से बँधे हुए हैं । सदा एकरस होने से न आपको जागता हुआ कहा जा सकता है, न सोता हुआ निरवस्थ होने से न आप वृद्ध लगते है, न बच्चे । न आप ह्रस्व(छोटे) हैं, न दीर्घ(बड़े) । निराकार होने से आप में सौन्दर्य या कुरुपता का प्रश्न ही नहीं उठता । अतः हे अवर्णनीय ! आपको प्रणाम है ॥५॥
(क्रमशः)

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