रविवार, 19 नवंबर 2017

= ब्रह्मस्तोत्र अष्टक(ग्रन्थ २३-७) =

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏 *श्री दादूदयालवे नमः ॥* 🙏
🌷 *#श्रीसुन्दर०ग्रंथावली* 🌷
रचियता ~ *स्वामी सुन्दरदासजी महाराज*
संपादक, संशोधक तथा अनुवादक ~ स्वामी द्वारिकादासशास्त्री
साभार ~ श्री दादूदयालु शोध संस्थान,
अध्यक्ष ~ गुरुवर्य महमंडलेश्वर संत श्री १०८ स्वामी क्षमारामजी महाराज
https://www.facebook.com/DADUVANI
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*= ब्रह्मस्तोत्र अष्टक(ग्रन्थ २३) =*
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*न रुष्टं न तुष्टं न इष्टं अनिष्टं ।*
*न जेष्ठं कनिष्ठं न मिष्ठं अमिष्ठं ।*
*न अग्रं न पृष्टं न तूलं गर्रिष्टं ।*
*नमस्ते नमस्ते नमस्ते अदृष्टं ॥७॥*
न आप किसी के प्रति क्रोध करते हैं, न किसी के प्रति आसक्त होकर उससे सन्तुष्ट होते हैं । न आप का कोई एकान्ततः इष्ट(प्रिय) है, अनिष्ट(अप्रिय) । न आप से कोई ज्येष्ठ(बड़ा) है, कनिष्ठ(छोटा) । न आपको मधुर ही कहा जा सकता है न कटु ।
निराकार होने से न आपका अग्रभाग है, न पिछला भाग । न आप रुई के समान हल्के हैं, न गरिष्ठ(भारी वजनदार) हैं । अतः हे अदृष्ट ! (इन्द्रियों से अग्राह्य, इन्द्रियातीत) आपको प्रणाम है ॥७॥
(क्रमशः)

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