卐 सत्यराम सा 卐
*अलख देव कोइ जाणैं भेव,*
*तहँ अलख देव की कीजै सेव ।*
*दादू बलि बलि बारंबार,*
*तहँ आप निरंजन निराधार ॥*
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साभार ~ नरेश आर्य
विश्व का सबसे रहस्यमय शिव मन्दिर की गुफाएं....जिसमें है#wormhole या #stargate याने के इस पृथ्वी से दूसरे लोक में और दूसरे आयामों में पहुँचने का शार्टकट ..
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तेलंगाना के निजामाबाद शहर से पच्चीस किलोमीटर दूरी पर एक गाँव है आर्मूर... यह गाँव एक ऊँची पहाड़ी श्रृंखला के तलहटी में बसा हुआ है इसका नाम 'अर्मूर' इसीलिए पड़ा क्योकि तेलुगु में आरु = छः(६) और मूरु = तीन(३) मिलाने से संयोग नौ बनता है ..
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इन पहाडियों पर नौ सिद्धों ने तप किया था इसीलिए इस गाँव का नाम आर्मूर और इन पहाड़ों का नाम नवनाथों की पहाड़ी या सिद्धों की पहाड़ी कहा जाता है .. इन पहाडो पर असंख्य गुफाएँ है और और उन्हीं गुफाओं में से एक में एक अत्यंत प्रचीन शिव मन्दिर है जहाँ पर गुरु गोरखनाथ मत्स्येन्द्रनाथ आदि नौ ऋषियों ने तप किया ..
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इससे जुडी एक सत्य कथा है .. आज से लगभग चालीस साल पहले उसी गाँव का एक किसान गायों के लिए घाँस लाने के लिए उसी पहाड़ी पर चढ गया और घाँस काट कर एक-दो बड़े गट्टर बाँध दिए .. उस पहाड़ी पर कई गुफाए हैं . और पास की गुफा से उन्हें कुछ साधू दिखाई दिए जैसे ही वह किसान उस गुफा के पास पहुंचा उन साधुओ ने प्रसाद लेने उन्हें गुफा के अंदर बुलाया...
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वह किसान उन साधुओं के साथ गुफा के अंदर चला गया वहाँ पर उसने कई दिव्य साधुओं को देखा और बड़ा शिव मन्दिर भी देखा कुछ देर तक शिव भजन करने के बाद लगभग एक घण्टे के बाद उसे याद आया के उसे तो गायों के लिए घाँस लेकर पहाड़ी के नीचे जाना है ... फिर क्या था वह तुरन्त गुफा से बाहर की ओर जाने लगा एक-दो साधू उसे गुफा के बाहर तक छोड़ने आये ..
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जैसे ही वह गुफा से बाहर निकाला तो उसके घाँस के गट्टर गायब थे वह सुबह को निकला था और अब दोपहर होने को आ रही थी प्यास भी लग रही थी इसीलिए वह बिना घाँस के नीचे गावं में अपने घर की ओर चल पड़ा ..रास्ते में उसे सब कुछ नया-नया सा लग रहा था आश्चर्य से अपना घर ढूँढ कर जैसे ही अंदर गया वह हैरान रह गया के उसके फोटो और पत्नी की बड़ी से फोटो पर एक माला चढाई हुई है और उस घर में सब नए लोग दिखाई दे रहे थे एक पल के लिए तो वह समझा के किसी दूसरे के घर में आ गया है .... लेकिन एक सत्तर साल के बूढ़े ने उसे पहचान लिया और पापा कह कर गले लगा लिया वह किसान तब लगभग तीस -पैंतीस साल का था लेकिन उसका बेटा अब सत्तर साल का हो चुका था .. यानि के उस किसान के गुफा में बिताए हुए एक-डेढ़ घण्टे में इस पृथ्वी के पचास साल बीत गए... इस परिवार के पोते पड़पोते आज भी उसी गाँव में रहते हैं....
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और इन पहाडियों के नीचे एक भूगर्भ जल की धारा भी बहती है जिसे स्थानीय वासी 'पाताल गंगा' कहते है जिसका पानी पीने के लिए देश विदेशो से लोग आते हैं, हमेशा बहुत लम्बी लाइन लगी रहती है ... इस पाताल गंगा का पानी पीने से हृदय रोग से लेकर कैंसर जैसे असाध्य रोग भी ठीक हो जाते हैं...
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और मुझे लगभग हर एक-दो महीने में एक बार किसी कार्यवश यदि आर्मूर जाना पड़ जाए तो मै उन पहाडियों पर गुफाओं में शिव मंदर जरूर जाता हूँ ! कहते हैं आज भी वह नौ सिद्ध उन पहाडियों में संचार करते हैं .. और उन पहाडियों से कैलाश से लेकर अतल सुतल तलातल पातळ से लेकर अनेक लोकों के लिए गुप्त रास्ते हैं ..जिन्हें आज भी मैं ढूंढ रहा हूँ.....

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