🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏 *श्री दादूदयालवे नमः ॥* 🙏
🌷 *#श्रीसुन्दर०ग्रंथावली* 🌷
रचियता ~ *स्वामी सुन्दरदासजी महाराज*
संपादक, संशोधक तथा अनुवादक ~ स्वामी द्वारिकादासशास्त्री
साभार ~ श्री दादूदयालु शोध संस्थान,
अध्यक्ष ~ गुरुवर्य महमंडलेश्वर संत श्री १०८ स्वामी क्षमारामजी महाराज
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*= ब्रह्मस्तोत्र अष्टक(ग्रन्थ २३) =*
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*न ग्रामं न धामं न शीतं न चोष्णं ।*
*न रक्तं न पीतं न श्वेतं न कृष्णं ।*
*न शेषं अशेषं न रेखं न रूपं ।*
*नमस्ते नमस्ते नमस्ते अनूपं ॥४॥*
न आपका कोई एक स्थायी ग्राम है न निवास, न आपको शीत(ठण्डक) कहा जा सकता है, न गरम । न आप लाल हैं न पीले, न सफ़ेद हैं न काले, आप तो निराकार होने से निर्वर्ण हैं । न आप शेष हैं न अशेष, न आपको रेखांकित किया जा सकता है न आपके रूप का वर्णन । अतः हे अनुपम ! आपको प्रणाम है ॥४॥
(क्रमशः)

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