शनिवार, 18 नवंबर 2017

= ब्रह्मस्तोत्र अष्टक(ग्रन्थ २३-६) =

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏 *श्री दादूदयालवे नमः ॥* 🙏
🌷 *#श्रीसुन्दर०ग्रंथावली* 🌷
रचियता ~ *स्वामी सुन्दरदासजी महाराज*
संपादक, संशोधक तथा अनुवादक ~ स्वामी द्वारिकादासशास्त्री
साभार ~ श्री दादूदयालु शोध संस्थान,
अध्यक्ष ~ गुरुवर्य महमंडलेश्वर संत श्री १०८ स्वामी क्षमारामजी महाराज
https://www.facebook.com/DADUVANI
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*= ब्रह्मस्तोत्र अष्टक(ग्रन्थ २३) =*
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*न बद्धं न मुक्तं न मौनं न वक्तुं ।*
*न धूम्रं न तेजो न यामी न नक्तं ।*
*न युक्तं अयुक्तं न रक्तं विरक्तं ।*
*नमस्ते नमस्ते नमस्ते अशक्तं ॥६॥*
न आपको बँधा हुआ कहा जा सकता है, न मुक्त । न आपके विषय में मौन(चुप) रहा जा सकता है, न आपको इत्थन्तया ही कुछ कहा जा सकता है । न आप धूआँ है न अग्नि, न आपको रात(दिन) के समय(प्रहार आदि) से किसी प्रकार बाँधा जा सकता है ।
न आप किसी से जुड़े हुए हैं, न नहीं जुड़े हुए । न आप किसी के प्रति आसक्त हैं, आपको विरक्त भी नहीं कहा जा सकता । अतः हे शक्ति(या माया) से भिन्न ! आपको प्रणाम है, प्रणाम है, प्रणाम है ॥६॥
(क्रमशः)

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