सोमवार, 20 नवंबर 2017

= ब्रह्मस्तोत्र अष्टक(ग्रन्थ २३-८) =

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏 *श्री दादूदयालवे नमः ॥* 🙏
🌷 *#श्रीसुन्दर०ग्रंथावली* 🌷
रचियता ~ *स्वामी सुन्दरदासजी महाराज*
संपादक, संशोधक तथा अनुवादक ~ स्वामी द्वारिकादासशास्त्री
साभार ~ श्री दादूदयालु शोध संस्थान,
अध्यक्ष ~ गुरुवर्य महमंडलेश्वर संत श्री १०८ स्वामी क्षमारामजी महाराज
https://www.facebook.com/DADUVANI
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*= ब्रह्मस्तोत्र अष्टक(ग्रन्थ २३) =*
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*न वक्त्रं न घ्राणंन कर्णं न अक्षं ।*
*न हस्तं न पादं न सीसं न लक्षं ।*
*कथं सुन्दरः सुन्दरं नामध्येय ।*
*नमस्ते नमस्ते नमस्ते अमेय ॥८॥*
*॥ स्माप्तोSयं ब्रह्मस्तोत्राष्टक ग्रन्थः ॥*
न आपको मुख(वाणी) घ्राण, श्रोत्र, आँख आदि ज्ञानेन्द्रियाँ हैं, न आपकी हाथ-पैर सिर आदि कर्मेन्द्रिय दिखायी देती हैं । महाकवि कहतेहैं - इस स्थिति में कोई भी किस तरह भक्त आपका गुणगान इस ‘नेति, नेति. पद्धति के अतिरिक्त और किस तरह कर सकता है ! अतः अप्रमेय(अनिवर्चनीय) आपको प्रणाम है, प्रणाम है, प्रणाम है ॥८ ॥
॥ ब्रह्मस्तोत्र-अष्टक समाप्त हुआ ॥
(क्रमशः)

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