रविवार, 17 दिसंबर 2017

= साधु का अँग =(१५/१२१-२)

#daduji

卐 सत्यराम सा 卐

*श्री दादू अनुभव वाणी* 
टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥
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*साधु का अँग १५*
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झूठा साचा कर लिया, काचा कंचन सार ।
मैला निर्मल कर लिया, दादू ज्ञान विचार ॥१२१॥
जिसने मिथ्यावादियों को सत्यवादी बना लिया, साधन में कच्चों को सुवर्ण - सार के समान पक्का और सुन्दर बना लिया, अविद्या - मल को ज्ञान द्वारा नष्ट करके निर्मल ब्रह्म रूप बना लिया, उसी सन्त का ज्ञान विचारने योग्य है और वही श्रेष्ठ सन्त है ।
*अमिट पाप*
काया कर्म लगाइ कर, तीरथ धोवे आइ ।
तीरथ माँहीं कीजिये, सो कैसे कर जाइ ॥१२२॥
१२२ - १२३ में कहते हैं - पवित्र होने के स्थान पर पाप करने से वह पाप अमिट हो जाता है - सँसारी प्राणी कुकर्मों द्वारा अन्त:करण के पाप लगाते हैं और तीर्थों में आकर उसे धोते हैं किन्तु तीर्थों में जो पाप किया जाता है, वह किस प्रकार जायगा ? वह तो अमिट हो जाता है ।
(क्रमशः)

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