बुधवार, 6 दिसंबर 2017

= अजब ख्याल अष्टक(ग्रन्थ २५-५गी/७दो) =

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏 *श्री दादूदयालवे नमः ॥* 🙏
🌷 *#श्रीसुन्दर०ग्रंथावली* 🌷
रचियता ~ *स्वामी सुन्दरदासजी महाराज*
संपादक, संशोधक तथा अनुवादक ~ स्वामी द्वारिकादासशास्त्री
साभार ~ श्री दादूदयालु शोध संस्थान,
अध्यक्ष ~ गुरुवर्य महमंडलेश्वर संत श्री १०८ स्वामी क्षमारामजी महाराज
https://www.facebook.com/DADUVANI
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*= अजब ख्याल अष्टक(ग्रन्थ २५) =*
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*= छन्द =* 
*माशूक मौला हक्क ताला,*
*तूं जिमी आसमान मौं ।* 
*है आब आतश बाद म्यानै१*
*खबरदार जीहान मौं ॥* 
*मालिक मलूक २ मालूम जिसकौं,*
*दुरस दिल ३ हर साल४ है ।* 
*यौं कहत सुंदर कब्जदुन्दर,*
*अजब ऐसा ख्याल है ॥५॥*
(१. म्यानै = मियाने = अन्दर, अन्तर्यामी ।)(२. मालूक = फ़रिश्ते, देवतागण ।)(३. दुरस दिल = दुरुस्त दिल = शुद्ध चित ।)(४. हरसाल = सदा ही ।) 
वह परमात्मा अन्तर्यामी  है । वह पृथ्वी, जल, तेज, वायु, आकाश में सर्वत्र व्यापक है । वह नित्य चेतन है । जिस भक्त व ज्ञानी का अन्तःकरण सदा शुद्ध रहता है उसी को उस सर्वदेवाधिपति ब्रह्म का साक्षात्कार हो पाता है ॥५॥ 
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*= दोहा =* 
*सुन्दर जो गाफिल हुआ ताऊ वह सांई दूर ।* 
*जो बन्दा हाजिर हुवा ताऊ हाजरां हजूर ॥७॥* 
भक्त(या ज्ञानी) अपने इस इन्द्रिय-निग्रह में थोड़ा भी असावधान होगा तो उस परम तत्व से वह दूर पड़ जायगा । यदि वह इसमें निरन्तर सावधान रहेगा तो उसे उस सर्वव्यापक के साक्षात्कार में कुछ भी बाधा न आयगी ॥७॥ 
(क्रमशः)

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