सोमवार, 4 दिसंबर 2017

= अजब ख्याल अष्टक(ग्रन्थ २५-३गी/५दो) =

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏 *श्री दादूदयालवे नमः ॥* 🙏
🌷 *#श्रीसुन्दर०ग्रंथावली* 🌷
रचियता ~ *स्वामी सुन्दरदासजी महाराज*
संपादक, संशोधक तथा अनुवादक ~ स्वामी द्वारिकादासशास्त्री
साभार ~ श्री दादूदयालु शोध संस्थान,
अध्यक्ष ~ गुरुवर्य महमंडलेश्वर संत श्री १०८ स्वामी क्षमारामजी महाराज
https://www.facebook.com/DADUVANI
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*= अजब ख्याल अष्टक(ग्रन्थ २५) =*
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*= छंद =
*काब्दस्त५ इस मैदान मैं,*
*चौगांन खेलै खूब है ।*
*असवार ऐसा तुरी वैसा,*
*प्यार उस महबूब है ॥*
*इस गोइ कौं लै जाइकै,*
*पहुँचाइ दे उस हाल६ है ।*
*यौं कहत सुंदर कब्जदुन्दर,*
*अजब ऐसा ख्याल है ॥३॥*
{५. काब्दस्त = चालाक, होशियार(काब = पासा । दस्त = हाथ)} {६. उस हाल = उस अवस्था, परमगति(तुरीयातीत पद)}
चतुर खिलाड़ी(सावधान भक्त) को अपने अंतःकरणरूपी मैदान में खूब खुलकर खेलना । राम नाम की साधना करना चाहिए । तब नामी(प्रख्यात) सवार(सावधान भक्त) हो, श्रेष्ठ घोड़ा(पवित्र अन्तःकरण) हो, उसकी अपने प्रियतम से मिलने की ललक(दृढ इच्छा) हो तो भक्तरूपी खिलाड़ी को खुलकर खेलने में क्या रुकावट हो सकती है ! ठोक-ठाक कर परमगति(तुरियावस्था) तक पहुँचा ही देना चाहिये । महाराज कहते हैं - अन्तः करण पर नियन्त्रण करना ही इस संसार में सबसे अधिक आश्चर्यजनक कार्य है ॥३॥
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*= दोहा =*
*सुंदर उसका नांव ले, एक उसी की चाह ।*
*रब्बु१ रहीम२ करीम३ वह, वह कहिये अल्लाह ॥५॥*
{१. रब्बु = रब्ब(अ०) पालनकर्ता} (२. रहीम = दया करनेवाला ।) (३. करीम = करम करनेवाला, देनेवाला ।)
भक्त को एकमात्र राम के नाम का जप करना चाहिये । उसी राम को जो की इस संसार का पालनहार, दयालु, शुभफल का दाता एवं सर्वव्यापक है, दिन-रात याद करना चाहिये ॥५॥
(क्रमशः)

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