🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏 *श्री दादूदयालवे नमः ॥* 🙏
🌷 *#श्रीसुन्दर०ग्रंथावली* 🌷
रचियता ~ *स्वामी सुन्दरदासजी महाराज*
संपादक, संशोधक तथा अनुवादक ~ स्वामी द्वारिकादासशास्त्री
साभार ~ श्री दादूदयालु शोध संस्थान,
अध्यक्ष ~ गुरुवर्य महमंडलेश्वर संत श्री १०८ स्वामी क्षमारामजी महाराज
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*= अजब ख्याल अष्टक(ग्रन्थ २५) =*
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*= छन्द =
*हाजिर हजूर कहैं गुसइँया,*
*गाफिलों कौं दूर है ।*
*निरसंध इकलस आप वोही,*
*तालियां भरपूर है ॥*
*बारीक सौं बारीक कहिये,*
*बडौं बड़ा बिसाल है ।*
*यौं कहत सुन्दर कब्जदुन्दर,*
*अजब ऐसा ख्याल है ॥६॥*
जो इन्द्रियनिग्रही ज्ञानी है उन्हें वह परम गुह्य तत्व निरन्तर सामने(अपरोक्ष) दिखायी देता है । हाँ, जो इस इन्द्रियनिग्रह में असावधान होगा तो उसे उस परमतत्व का साक्षात्कार कैसे हो सकता है । वह तत्व अखण्ड, पूर्ण एवं सर्वव्यापक है । वह सूक्ष्म से सूक्ष्मतर और महान् से भी महान् है ।(तु० “अणोरणीयान्” - उपनिषद्) । निष्कर्ष यह है कि इस इन्द्रियनिग्रह रूप आश्चर्यजनक उपाय के सिवा उस ब्रह्म के साक्षादृर्शन का और कोई उपाय नहीं है ॥६॥
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*= दोहा =*
*सुन्दर साँईं हक्क है, जहाँ तहाँ भरपूर ।*
*एक उसी के नूर सौं, दीसै सारे नूर ॥८॥*
वह ब्रह्म इस समय सृष्टि का नियन्ता है । सर्वव्यापक है । उसी के तेज(चैतन्य) से यह समय जगत् चेष्टावान्(क्रियावान्) है ॥८॥
(क्रमशः)

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