बुधवार, 28 नवंबर 2018

= १८८ =


🌷🙏🇮🇳 #daduji 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 卐 सत्यराम सा 卐 🇮🇳🙏🌷
*नीच ऊँच मध्यम को नांही,* 
*देखूं राम सबन के मांही ॥*
*दादू सांच सबन में सोई,* 
*पैंड पकर जन निर्भय होई ॥*
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साभार ~ Pardeep Grover

*श्रीकृष्ण द्वारा दी गयी एक दिव्य शिक्षा*
महाभारत के एक प्रसंग में आता है कि एक बार श्रीकृष्ण, बलराम और सात्यकि यात्रा के दौरान शाम हो जाने के कारण एक भयानक वन में रात्रि विश्राम के लिये ये निश्चय करके रुके कि दो-दो घंटे के लिए बारी-बारी से पहरा देंगे ।
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उस जंगल में एक बहुत भयानक राक्षस रहता था, जब सात्यकि पहरा दे रहा था जो उस राक्षस ने उसे छेड़ा, भला-बुरा कहा, उनका युद्ध हुआ, वो पराजित होकर जान बचाकर बलराम जी के पास आ कर छुप गया ।
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बलराम जी को भी राक्षस ने बहुत उकसाया, उनके साथ भी युद्ध हुआ, बलराम जी ने देखा कि राक्षस की शक्ति तो बढ़ती ही जा रही हैँ तब उन्होंने श्रीकृष्ण को जगाया ।
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राक्षस ने उन्हें भी छेड़ा, अपशब्द कहे, उकसाया । तब श्रीकृष्ण ने राक्षस को कहा की तुम बहुत भले आदमी हो, तुम्हारे जैसे दोस्त के साथ रात अच्छे से कट जायेगी । तब राक्षस ने हंसकर पूछा, मैं तुम्हारा दोस्त कैसे ?
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श्रीकृष्ण बोले - भाई तुम अपना काम छोड़कर मेरा सहयोग करने आये हो, तुम सोच रहे हो मुझे कही आलस्य न आ जाय, इसलिए हंसी-मजाक करने आ गये । राक्षस ने उन्हें बहुत छेड़ने, उकसाने की कोशिश की, लेकिन वो हँसते ही रहे । परिणाम यह हुआ कि राक्षस की ताकत घटने लगी और देखते ही देखते एक छोटे मक्खी जैसे हो गया, उन्होंने उसे पकड़कर अपने पीताम्बर में बांध लिया ।
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श्रीकृष्ण ने दोनों से कहा कि जानते हो ये राक्षस कौन है ? तब उन्होंने बताया कि इसका नाम है - आवेश ।
मनुष्य के अंदर भी यह आवेश(क्रोध) का राक्षस घुस जाता हैँ, मनुष्य उसे जितनी हवा देता है, उतना ही वह दोगुना, तिगुना, चौगुना होता चले जाता हैँ । इस राक्षस की ताकत तभी घटती हैँ, जब इंसान अपने आपको संतुलित रखता है, हर समय मुस्कुराता रहता हैँ, क्रोध रूपी राक्षस की जितनी उपेक्षा करोगे, वह उतना ही घटता जायेगा और जितना बदले की भावना रखोगे, यह बढ़ता चला जायेगा ।
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कथा सार :-
आज छोटी छोटी बातों पर गुस्सा हो जाना। घर परिवार, पड़ोस , सभी जगह पर न होने जैसी बातों पर भी हम आवेश और क्रोध में आ जाते हैं। हम सोचते हैं हम सामने वाले से गुस्सा हो कर उसे सजा दे रहे हैं पर ऐसा नहीं है गुस्से में सब से ज्यादा नुकसान हम अपने स्वयं का ही करते हैं। हमारी गुस्से के दौरान मन की स्थिति अव्यवस्थित होती है जिसका असर हमारे तन पर होता है जिससे हमारी धड़कन हृदयगति तेज हो जाती है, हमारा रक्तचाप B.P. भी बढ़ जाता है और भी बहुत कुछ होता है ।और इन सब के कारण हम काफी लंबे समय तक अशान्त भी रहते हैं। तो गुस्से में हमने ज्यादा नुकसान किसका किया?
*अतः इस राक्षस की शक्ति को और मत बढ़ाओ।*
*_अपने गुस्से पर नियंत्रण करने का प्रयास करो।...:::!!!_*

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