मंगलवार, 29 जनवरी 2019

= सुन्दर पदावली(१५.राग सिंधूड़ो - २/१) =

#daduji
॥ श्री दादूदयालवे नमः ॥ 
स्वामी सुन्दरदासजी महाराज कृत - *सुन्दर पदावली* 
साभार ~ महंत बजरंगदास शास्त्री जी, 
पूर्व प्राचार्य ~ श्री दादू आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(जयपुर) व राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(चिराणा, झुंझुनूं, राजस्थान) 
*= १५.राग सिंधूड़ो =*
(२/१) 
*सोई सूरबीर सावंत सिरोमनि रन मैं जाइ गलारै रे ।* 
*आप आपणा घर मैं बैठा गाल सबै कोई मारै रे ॥टेक॥* 
*नागौ लडै पहरि केसरियौ सत बादी सत भाषै रे ।* 
*श्याम भरोसै संक न कोई और वोट नहिं राषै रे ॥१॥* 
*ह्वै मरणीक आस तजि तनकी रोपि रहै रन मांहीं रे ।* 
*दोनौं प्रांणी जुडै जब सनमुष तब पाछा दे नांही रे ॥२॥*
कोई शूर वीर योद्धा ही युद्ध में खड़ा होकर छाती ठोककर कुछ कह सकता है । अन्यथा घर में बैठ कर तो सभी लोग दहाड़ते रहते हैं ॥टेक॥ 
युद्ध में सन्नद्ध होकर कोई वीर ही किसी की प्रतिद्वन्दिता, केसरिया वस्त्र पहन कर कर सकता है । वह अपने इष्टदेव के सहारे से खुलकर युद्ध करता है । उसमें कोई कमी नहीं रहने देता ॥१॥ 
वह अपना सिर हथेली पर रख कर रण में जूझता है । दोनों प्रतिद्वन्दियों में कोई पीछे हटने की बात नहीं सोचता ॥२॥ 
(क्रमशः)

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