#daduji
॥ श्री दादूदयालवे नमः ॥
स्वामी सुन्दरदासजी महाराज कृत - *सुन्दर पदावली*
साभार ~ महंत बजरंगदास शास्त्री जी,
पूर्व प्राचार्य ~ श्री दादू आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(जयपुर) व राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(चिराणा, झुंझुनूं, राजस्थान)
.
*= १५.राग सिंधूड़ो =*
.
(२/१)
*सोई सूरबीर सावंत सिरोमनि रन मैं जाइ गलारै रे ।*
*आप आपणा घर मैं बैठा गाल सबै कोई मारै रे ॥टेक॥*
*नागौ लडै पहरि केसरियौ सत बादी सत भाषै रे ।*
*श्याम भरोसै संक न कोई और वोट नहिं राषै रे ॥१॥*
*ह्वै मरणीक आस तजि तनकी रोपि रहै रन मांहीं रे ।*
*दोनौं प्रांणी जुडै जब सनमुष तब पाछा दे नांही रे ॥२॥*
कोई शूर वीर योद्धा ही युद्ध में खड़ा होकर छाती ठोककर कुछ कह सकता है । अन्यथा घर में बैठ कर तो सभी लोग दहाड़ते रहते हैं ॥टेक॥
युद्ध में सन्नद्ध होकर कोई वीर ही किसी की प्रतिद्वन्दिता, केसरिया वस्त्र पहन कर कर सकता है । वह अपने इष्टदेव के सहारे से खुलकर युद्ध करता है । उसमें कोई कमी नहीं रहने देता ॥१॥
वह अपना सिर हथेली पर रख कर रण में जूझता है । दोनों प्रतिद्वन्दियों में कोई पीछे हटने की बात नहीं सोचता ॥२॥
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें