#daduji
॥ श्री दादूदयालवे नमः ॥
स्वामी सुन्दरदासजी महाराज कृत - *सुन्दर पदावली*
साभार ~ महंत बजरंगदास शास्त्री जी,
पूर्व प्राचार्य ~ श्री दादू आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(जयपुर) व राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(चिराणा, झुंझुनूं, राजस्थान)
.
*= १५.राग सिंधूड़ो =*
.
(१/२)
*अंग उघाडै उतरि अषाडै परदल पाडै सूरा रे ।*
*रहै हजूरि राम कै आगै मुष परि बरषै नूरा रे ॥३॥*
*काम धणीं कौ सबै संबार्यौ साहिब कै मन भायौ रे ।*
*कछू एक जस गुरु दादू कौ सुन्दरदास सुनायौ रे ॥४॥*
वे विशाल जनसभाओं में भी एकाकी ही जाते हैं और वहाँ श्रद्धालु जनता को ऐसा हृदयोद्बोधक उपदेश करते हैं कि उसका जनता के हृदय पर तत्काल प्रभाव पड़ता है । इसका एकमात्र कारण यही प्रतीत होता है कि वे निरंतर भगवान् का नामस्मरण करते हैं । नामस्मरणकर्ता भक्त के वचन ऐसे प्रभावोत्पादक हो ही जाते हैं ॥३॥
उनने अपने स्वामी(भगवान्) की आज्ञा का पालन पूर्णत: कर दिया है । वह कार्य उनके मालिक(परमेश्वर) को भी अनुकूल प्रतीत हुआ ।
हमने अपने गुरुदेव के इन कुछ ही कृत्यों को स्पष्ट कर जनता को सुनाया है - ऐसा श्रीसुन्दरदासजी महाराज कहते हैं ॥४॥
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें