बुधवार, 29 मई 2019

= सुन्दर पदावली(२२. राग सारंग - ८) =

#daduji

॥ श्री दादूदयालवे नमः ॥ 
स्वामी सुन्दरदासजी महाराज कृत - *सुन्दर पदावली* 
साभार ~ महंत बजरंगदास शास्त्री जी, 
पूर्व प्राचार्य ~ श्री दादू आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(जयपुर) व राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(चिराणा, झुंझुनूं, राजस्थान) 
.
*आये मेरे अलष पुरुष के प्यारे ।* 
*परंम हंस अतिसै करि सोभित*
*निर्मल दशा निहारे ॥(टेक)* 
*देषत ही शीतलता उपजी*
*मिलत सकल अघ जारे ।* 
*बचन सुनत भै भ्रम सब भागे,*
*संसै सोक निवारे ॥१॥* 
*चरणामृत लेत ही परम सुष,*
*उपज्यौ आज हमारे ।* 
*शीत पाइकैं मुक्त भये हैं,*
*काटे बन्धन सारे ॥२॥* 
*महिमा अनंत कहां लग बरनौं,*
*कहित कहित कहि हारे ।* 
*आप सरीषे किये तुरतही,*
*सुन्दर पार उतारे ॥३॥* 
उस अलक्ष्य पुरुष के उपासक मेरे घर पधारे हैं । वे आचरण से परमहंस(अवधूतवृति वाले) वृति से अत्यधिक शोभायमान, निर्मल(स्वच्छ) चर्या वाले हैं ॥टेक॥ 
जिनके दर्शनमात्र से द्रष्टा का हृदय शीतल(शान्त) हो जाता है । जिनके मिलने मात्र से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं । उपदेश वचनों से समस्त सांसारिक भय एवं भ्रम मिट जाते हैं, तथा सभी संशय एवं शोक दूर हो जाते हैं ॥१॥ 
जिनका चरणामृत पान करते ही हमारे हृदय में उत्तम सुख उत्पन्न होने लगा है । ऐसा शीतल सुख पाकर हम सभी दु:खों से मुक्त हो गये हैं । हमारे सभी सांसारिक बन्धन शिथिल हो(कट) गये हैं ॥२॥ 
इनकी महिमा अतिशय अपार एवं अनन्त है, अतः मैं इसका कहाँ तक वर्णन करूँ । इस का वर्णन करने वाले सभी थक चुके हैं । आपकी यही विशेषता है कि आप किसी को दर्शन देते ही उसे अपने ही सदृश बना लेते हैं तथा भवसागर से पार कर देते हैं ॥३॥
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें