#daduji
॥ दादूराम सत्यराम ॥
*श्री दादू अनुभव वाणी*
टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥
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*विनती का अँग ३४*
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तुम तैं तब ही होइ सब, दरश परश दर१ हाल२ ।
हम तैं कबहुं न होइगा, जे बीतहिं युग काल ॥७५॥
भगवन् ! आप कृपा करें तब तो उसी१ समय - में२ तत्काल आपका मिलन दर्शनादि सभी कार्य हो जाते हैं, किन्तु हमारे पुरुषार्थ से तो यदि अनन्त युगों का समय व्यतीत हो जाय तो भी आपका दर्शन होना कभी संभव न हो सकेगा ।
(क्रमशः)

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