मंगलवार, 18 जून 2019

= बेली का अँग ३६(१५-१६) =

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॥ दादूराम सत्यराम ॥ 
*श्री दादू अनुभव वाणी* 
टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥ 
*बेली का अँग ३६*
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सतगुरु संगति नीपजे, साहिब सींचनहार ।
प्राण वृक्ष पीवै सदा, दादू फले अपार ॥१५॥
सद्गुरु की संगति से जीवात्मा में भक्ति उत्पन्न होती है, फिर यदि परमात्मा अपने अनुग्रह जल से सींचने वाले हों और प्राणी - वृक्ष उस जल को सदा पान करता रहे अर्थात् भगवत् - कृपा का अनुभव करता रहे तो असीम अभेद - ज्ञान रूप फल प्राप्त होता है ।
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दया धर्म का रूँखड़ा१, सत सौं बधता जाइ ।
सँतोष सौं फूलै फलै, दादू अमर फल खाइ ॥१६॥
इति बेली का अँग समाप्त: ॥ ३६ ॥ सा - २५१६ ॥
दया रूप धर्म का वृक्ष१ सत्यपालन द्वारा बढ़ता है, पूर्ण सँतोष से उसके भक्ति रूप फूल और ब्रह्मज्ञान रूप फल आता है । उस फल को जो खाता है अर्थात् अभेद रूप से धारण करता है, वह अमर हो जाता है ।
इति श्रीदादू गिरार्थ प्रकाशिका बेली का अँग समाप्त: ॥३६॥
(क्रमशः)

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