🌷🙏🇮🇳 #daduji 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 卐 सत्यराम सा 卐 🇮🇳🙏🌷
*सुख मांहि दुख बहुत हैं, दुख मांही सुख होइ ।*
*दादू देख विचार कर, आदि अंत फल दोइ ॥*
================
साभार ~ Chetan Panchal
.
मानस : दशरथ ...day 4..।।
.
*बापू ...दुख से मुक्ति कैसे हो..?*
ये संदर्भ है की नही खबर नही....लेकिन एक युवक का प्रश्न है....इसलिए मे वही से शुरु करुँ ...।।
दुख से मुक्ति कैसे हो...?..
बुद्ध ने कहां था दुख है...दुख के कारण भी है....दुख का निवारण भी है....दुख के हेतु भी है....
एक युवा का प्रश्न है....और ये प्रश्न कभी बूढ़ा नही होता....ये प्रश्न कायम युवान रहा है.....की दुखो से नितांत निवृति कैसे हो....
मै कोई इस प्रश्न का उतर देने का अधिकारी हूं...ऐसा मै नही कह शकता....लेकिन मै इतना जरुर कह शकता हूं....मेरी बात यदि आप तक पोहचे तो....
दुख से मुक्ति ....जब तक हम सुख से मुक्त नही होंगे तब तक कभी नही होंगे.....एक मात्र उपाय है.....
जिसको दुख से मुक्त होना है.....उसको सुख से मुक्त होना ही पडेगा.....क्योकि सापेक्ष है....ये दोनो रिलीटिव सापेक्ष है.....
और हम सुख से मुक्त होना नही चाहते.....हम संसारी...मै आपके साथ हूं....ये तो बोलने के लिये बैठा हूं तो थोडा उपर बैठा हूं.....आपके साथ..हूं...हमराही है....
जब तक हमारा चित हमारी मनोदशा इस बात के लिए राजी नही होते तब तक दुख से मुक्त होना मुश्किल है...।।।..सुख से मुक्त होना पडेगा.....क्योकि सापेक्ष है....
हम रोज कथा मे आते है..... मै थोडा लेट आता हूं....30 मीनीट लग जाते है.....अमेरिका मे कई बार रामकथा के प्रताप से आना पडा है......हम देखते है...की कभी कभी हम ऐसे समय पर निकलते है.....तो हरेक लाल लाईट ही मिलती है....लगेगा की इसके बाद ग्रीन लाइट ही मिल जाएगी.....लेकिन जैसे जाओ....लाल....रुको...फिर आगे बढे.....पता नही किसीने सेटींग किया है.....
कभी कभी ऐसा लगता है की हर हरी लाइट मिल जाए.....जिवन मे कभी कभी...लगातार लाल लाईट मिल जाती है.....जिव को...
एक दुख पुरा होता है.....फिर दुसरा प्रगट होता है....और लगता है....की जो पुरा हुआ...वो तो अच्छा था....ये तो बहोत भयानक है....और जब ये पुरा होता है...तो तीसरा के कुपले निकलती है....लगता है...गया ये तो ज्यादा ठीक था.....ये तो बहोत भीषण है...हर लाल लाइट लाल लाईट....और कभी कभी... हरी लाईट....एक सुख फिर दुसरा सुख.....मै दशरथ को केन्द्र मे रखकर..मै आपके प्रश्न का उतर ....कोशिश कर रहा हूं.....
मुझे लगता है की लाल लाइट मिले ये भी जिवन का पूर्णता नही है....और केवल हरी लाइट मिले ये भी पूर्णता नही.. है...कभी कभी ऐसा होता है....की दो लाइट लाल मिले....दो तीन हरी भी मिलती है.....
जिवन है सुख दुख का संगम....है...
कभी सुख तो कभी दुख.....।।।
■■■ प्रिय : बापू ....👏🏻😊

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें