🌷🙏🇮🇳 #daduji 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 卐 सत्यराम सा 卐 🇮🇳🙏🌷
*दादू देखौं निज पीव को, और न देखौं कोइ ।*
*पूरा देखौं पीव को, बाहिर भीतर सोइ ॥*
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साभार ~ Rupa Khant <BAPU KE SHABD.....>
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............लंका की पूर्णिमा ..........
राम लखन अपनी सेना के साथ लंका में सुबेल के शिखर पर..... सायंकाल का समय है और प्रभु पुष्पगुच्छों से बनायी एक शैया है ...मृगछाल उसपर बिछाया है और भगवान विश्राम के लिये ......पूर्व दिशा में देखा ...तो देखा पूर्णिमा का चाँद निकला है लंका में ....कैसा चाँद दिखता है ?...
जैसे कोई केसरी सिंह ...शेर की तरह निर्भयता से उदित हुआ है ....और अंधेरे रूपी हाथी के माथे को चीर डालता है ...उसके कुंभस्थल को चीर देता है ....उसमें से मोती निकलते हैं ....
तो रात के मदमस्त हाथी को चंद्र ने हमला करके गंडस्थल को चीरा तो मोती निकले ...वो सब सितारे हो गये ....ये सब ...रात्री सुंदर स्त्री है ...उसके आभूषण हैं ...
भगवान ने कहा ....मित्रों ...ये आकाश में जो चाँद है उसमें जो श्यामता है ...वो आप बतायें अपनी बुद्धि से कि ये क्या है ?.....और सब अपना अपना अभिप्राय देते हैं .....
सुग्रीव ने कहा चंद्र में जो काला दाग है ...मुझे लगता है कि चंद्र पर पृथ्वी की छाया पड़ती है ....सुग्रीव भौतिकवादी है ...उसको राज्य चाहिये जो उसका छीना गया था इसलिये उसको चंद्र में भूमि दिखती है ...
किसीने कहा कि राहू उसको ग्रसने गया ना ...लात मारी ...तो इसलिये उसमें श्यामता आ गई ...और ये कोई बोला ......ये कोई कौन बोला ....ये कोई और नहीं विभीषण बोला ...लात खाकर आया है ना ...तो उसको ये नज़र आया ....
फिर कोई बोला कि विधाता ने कामदेव की पत्नी रती को बनाया ..तो बहुत सुंदर चेहरा बनाने के लिये चंद्रमा से 4 भाग की सुंदरता ले ली ...और रती के मुख में डाल दी ...तो ये 4 कला निकल गई और छिद्र दिखने लगे ...तो उसमें से आसमान दिख रहा है ....ये बहुत संसारी भाव में डूबा अंगद बोला है ....
सब ने कहा महाराज हम पर डालते हो तो इस सम्मेलन के प्रमुख तो आप हैं ..आप बताओ आपको क्या लगता है ?..भगवान ने कहा प्रमुख मैं नहीं हनुमान है ...हनुमान ने कहा प्रमुख मैं कहाँ ?...
भगवान ने कहा मुझे लगता है ये ज़हर चंद्र का भाई है ...दोनों समुद्र से निकले ...चंद्र बड़ा भाई ..और बड़े भाई को छोटे भाई के प्रति बहुत प्रीत होती है ...इसलिये ज्येष्ठ चंद्रमा ने अपने छोटे भाई को अपने सीने में बिठाया ...जैसे मैं भरत को मेरे सीने में रखता हूँ ....
सब हनुमानजी को कहे ...अब आप बोलो ..हनुमानजी कहे मुझसे मत बुलवाओ ...आपके बोलने पे सब पानी फिर जायेगा ...मैं ना बोलूँ वोही ठीक रहेगा ....मैं चंचल हूँ ...मेरे निवेदन का कोई अर्थ नहीं रहेगा ...
अंगद सत्य नहीं है ...सुग्रीव तो बिल्कुल झूठा ...विभीषण ठीक नहीं महाराज .....मेरे बाप हो आप लेकिन आप भी ठीक नहीं बोल रहे ....हे प्रभु ...सुनो ....ये चंद्र आपका दास है ...सेवक ....आप रहते हो कहाँ ?......बोले मैं भक्तों के हृदय में रहता हूँ .....महाराज माफ करियेगा ...आप गोरे नहीं हैं ....आप काले हैं ...आपका रंग श्याम है ....तो मुझे चंद्रमा के हृदय में बैठा साँवरा रघुनंदन दिखता है ....इसके सिवा कोई नहीं ....मुझे तो तू ही तू दिखता है ......मेरी गुरुपूर्णिमा तू है ....भगवान हँस पड़े ...
गुरुपूर्णिमा का आखिरी सूत्र ये है कि हमें कुछ ऐसी गुरु के द्वारा दिशा प्राप्त हो जाये तो पूरे जगत में राम की ही झलक दिखे .....राम की ही श्यामता नज़र आये ....
बापू के शब्द ~ मानस गुरुपूर्णिमा
जय सियाराम

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