बुधवार, 26 जून 2019

= *उपदेश चेतावनी का अंग ८२(२९/३२)* =

🌷🙏🇮🇳 #daduji 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 卐 सत्यराम सा 卐 🇮🇳🙏🌷 
*दादू सब जग नीधना, धनवंता नहीं कोइ ।*
*सो धनवंता जाणिये, जाके राम पदार्थ होइ ॥* 
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**श्री रज्जबवाणी** 
टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥ 
साभार विद्युत् संस्करण ~ Tapasvi Ram Gopal
*उपदेश चेतावनी का अंग ८२*
रज्जब रतनों सौं भरी, मानहुं मनिखा देह । 
रे नर निर्धन हो गया, चौरासी के गेह ॥२९॥ 
हे नर ! हमारी बात मान, यह मनुष्य देह दैवी गुण गुण रूप रत्नों से भरी हुई है, इसे हरि भजन द्वारा सफल कर, नहीं तो आगे लख चौरासी योनियों के स्थान में उक्त धन से रहित निर्धन ही होगा । 
मनिखा जन्म राम बिन हारा, 
मानहुं पारस पीस पहुमि१ पर डारा । 
सेवा सोना तिनहुं न होय, 
या सम हानि नहीं कलि कोय ॥३०॥ 
राम भजन बिना मनुष्य जन्म को खो देना मानो पारस को पीसकर पृथ्वी१ पर डालना है, जैसे पीसे हुये पारस से सोना नहीं होता, वैस ही लख चौरासी योनियों में जाने पर भक्ति नहीं होती । कलियुग में इसके समान महान् हानि और कोई भी नहीं है । 
हीरा लाल मिनख तन येहा१, 
पिशुन२ पीस कर डारै खेहा३ । 
वह माँटी नाहीं वहिं४ मौला५, 
रज्जब चेत न देखै भोला६ ॥३१॥ 
यह१ मनुष्य तन हीरा, लाल के समान है, जैसे दुष्ट२ हीरा और लाल को पीस कर घूलि३ में डाल दे तब वे मिट्टी हो जाते हैं फिर उनसे धन नहीं मिलता, वैसे ही मनुष्य शरीर के विषयों में ही लगा दिया जाय तो उससे४ ईश्वर५ नहीं मिलते, अत: हे अनजान६ ! सावधान होकर मनुष्य देह द्वारा प्रभु को क्यों नहीं देखता ? 
काम धेनु कल्पतरु जाना, मिनखा देह नाँहिं सन्माना । 
सब साबित सबहीं सब पावै, रज्जब बिनसै सो न लखावै ॥३२॥ 
मनुष्य देह को कामधेनु और कल्पवृक्ष जानकर उसका सन्मान नहीं किया, मनुष्य देह ठीक मार्ग पर होने से सभी को सब कुछ प्राप्त होता है और मनुष्य देह भोगों में व्यर्थ ही नष्ट हो जाय तो वह प्रभु भी नहीं देखा जाता । 
(क्रमशः)

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