🌷🙏🇮🇳 #daduji 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 卐 सत्यराम सा 卐 🇮🇳🙏🌷
https://www.facebook.com/DADUVANI
*श्री दादू अनुभव वाणी, द्वितीय भाग : शब्द*
*राग गौड़ी १, गायन समय दिन ३ से ६*
टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥
.
१. स्मरण शूरातन नाम निश्चय । त्रिताल
राम नाम नहीं छाडूँ भाई,
प्राण तजेँ निकट जिव जाई ॥टेक॥
रती रती कर डारै मोहि,
सांई संग न छाडूँ तोहि ॥१॥
भावै ले शिर करवत दे,
जीवन मेरी न छाडूँ ते ॥२॥
पावक में ले डारै मोहि,
जरै शरीर न छाडूँ तोहि ॥३॥
अब दादू ऐसी बन आई,
मिलेँ गोपाल निसान१ बजाई ॥४॥
नाम स्मरण में दृढ़ निश्चय पूर्वक शौर्य्य दिखा रहे हैं - हे भाई ! हम प्राण त्याग सकते हैं, चाहे निकट भविष्य में ही हमारा जीव शरीर को त्यागकर चला जाय, तो भी हम राम - नाम को नहीं त्यागेंगे । चाहे शरीर के गुंजा समान टुकड़े - टुकड़े कर डालें, शिर पर आरा चलावें, शरीर को अग्नि में डाल कर जलावें तो भी हम परमात्मा का स्मरण रूप संग नहीं छोडेंगे । अब तो हमारी ऐसी अवस्था हो गई है कि - हम नगाड़ा१ बजाकर डँके की चोट भगवान् से मिलेंगे ।
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें