शनिवार, 8 जून 2019

= साक्षीभूत का अँग ३५(४ - ६) =

#daduji

॥ दादूराम सत्यराम ॥ 
*श्री दादू अनुभव वाणी* 
टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥ 
*साक्षीभूत का अँग ३५*
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*कर्त्ता साक्षीभूत*
करता है सो करेगा, दादू साक्षीभूत ।
कौतिकहारा१ ह्वै रह्या, अणकरता अवधूत२॥४॥
४ - ६ में परमात्मा की साक्षी रूपता दिखा रहे हैं, साक्षी रूप परमात्मा ही सत्ता द्वारा सब कुछ करता है और करेगा, किन्तु फिर भी वह खेल१ करने वाले वो खेल देखने वाले के समान अकर्त्ता रह कर कर्म - फलादि सबसे मुक्त२ रहता है ।
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दादू राजस कर उत्पत्ति करै, सात्विक कर प्रतिपाल ।
तामस कर परलै करै, निर्गुण कौतिकहार ॥५॥
साक्षी रूप परमात्मा सत्ता द्वारा राजस शक्ति से उत्पत्ति, सात्विक शक्ति से पालन, तामस शक्ति से प्रलय करते हैं और निर्गुणरूप से खिलाड़ी के वो खेल देखने वाले के समान इस खेल से अलग ही रहते हैं ।
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दादू ब्रह्म जीव हरि आत्मा, खेलैं गोपी कान्ह ।
सकल निरन्तर भर रह्या, साक्षीभूत सुजान ॥६॥
हे सुजान साधक ! वह साक्षी रूप परमात्मा ही ब्रह्म, ईश्वर, जीव और आत्मा रूप से पुकारा जाता है तथा सब चराचर जगत् में निरन्तर परिपूर्ण रूप से रहता है और वही कृष्ण बन कर अपनी भक्त गोपियों की इच्छा पूर्ति के लिए रास खेलता है ।
(क्रमशः)

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