बुधवार, 12 जून 2019

= सुन्दर पदावली(२३. राग मल्हार - ५/१) =

#daduji

॥ श्री दादूदयालवे नमः ॥ 

स्वामी सुन्दरदासजी महाराज कृत - *सुन्दर पदावली* 
साभार ~ महंत बजरंगदास शास्त्री जी, 
पूर्व प्राचार्य ~ श्री दादू आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(जयपुर) व राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(चिराणा, झुंझुनूं, राजस्थान) 
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*करम हिंडोलना झूलत सब संसार ।* 
*है हिंडोल अनादि कौ 
यह फिरत बारम्बार ॥(टेक)* 
*दोइ षम्भ सुष दुःख अडिग 
रोपे भूमि माया मांहिं ।* 
*मिथ्यात ममता कुमति कुदया, 
चारि डांडी आहिं ॥* 
*पाप पटली पुन्य मरवा, 
अधो ऊरध जांहिं ।* 
*सत्व रज तम देहिं झोटा, 
सूत्र षैंचि झुलाहिं ॥१॥* 
कर्महिं डोला : यह समस्त संसार अपने कर्महिंडोले में झूल रहा है । यह हिंडोला अनादि काल से चला आ रहा है और रह रह कर यहीं घूम रहा है ॥टेक॥ 
इसके सुख एवं दुःख दो अडिग स्तम्भ हैं । सांसारिक माया इसकी भूमि है । असत्य, ममता, दुर्बुद्धि एवं निर्दयता – ये चार इसके दण्ड हैं । पाप इसकी पटली एवं पुष्प मरवा – ये ऊपर नीचे आते जाते रहते हैं । सत्त्व, रज एवं तम – ये तीनों दोष झोटा देकर इस झूले को झुलाते रहते हैं ॥१॥
(क्रमशः)

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