शुक्रवार, 14 जून 2019

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🌷🙏🇮🇳 #daduji 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 卐 सत्यराम सा 卐 🇮🇳🙏🌷
*सतगुरु काढे केस गहि, डूबत इहि संसार ।*
*दादू नाव चढाइ करि, कीये पैली पार ॥*
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साभार ~ Rupa Khant

मैं मेरे जीवन की ...बचपन की 1 बात कहूँ ...देहातों में रहे होंगे उन सबके अनुभव होंगे ...मैं जब छठ्ठी सांतवी श्रेणी में पढ़ता था ...और रोज़ महुवा मैं पैदल जाता था ...और जो रोड है वो रोड नहीं था ...नीचे बगल में जो खाई है ...वोही रास्ता था ...इतने इतने कीचड में कांटे हैं..साँप हैं ..बिच्छू ...सबको हम लकडी से ऐसे करते करते हम रोज़ जाते थे ....आते थे ...

बहुत बारिश होती थी तो फोडा पड़ता था (दलदल)....उसमें एक बार आदमी अंदर आ जाये ना तो फिर निकल नहीं सकता ...तलगाजरडा का एक युवक उस दलदल में बेचारा फँस गया ...किसान का लड़का था ......

इसमें आप घुटनों तक अंदर जाओ तो आपको लगे कि मैं एकदम निकल जाऊँ ...तो आप जितना निकलने की कोशिश करो ....इतना ज़्यादा फँसोगे ....उस व्यक्ति की death हो गई ...कोई अगल बगल में नहीं था ...वो बेचारा नासमझ रहा होगा ....आदमी है जिजीविषा होती है कि मैं बच जाऊँ ...अभी इतना ही फँसा हूँ तो निकल जाऊँ ....

गाँव वाले जानते हैं कि ऐसे दलदल में हम जब फँसते हैं तब कोई प्रयास नहीं करना चाहिये ...ऐसे ही खड़े रह जाओ ...ज़रा भी हिले तो अंदर और गये ...यदि आप ऐसे ही बिना हलचल के जितने अंदर गये हो रहोगे ...तो ज़्यादा नहीं जाओगे ....और इतने में ही कोई ना कोई पथिक आयेगा ...और वो तुम्हारा हाथ पकड़कर के ...खींचकर के ...एकदम बाहर निकाल देगा ....

सुग्रीव की दशा यही है ...वो निरंतर दलदल में फँसा जा रहा है ...
पावा राज कोष पुर नारी ....
फँसता ही जा रहा है......

ऐसे जब हम फँसते हैं दलदल में ...तब कोई ...जिससे पहचान ना हो ...कोई भी हो ...और वो हमारे हाथ पकड़कर ...खींचकर .....सुग्रीव कहता है महाराज अब मुझे पता लगता है कि दलदल में फँसता है वो बाहर नहीं निकल सकता ....प्रयास किये और ज़्यादा अंदर ...खत्म .....उस समय तो ऐसे ही स्थिर रहना चाहिये .....

किसीकी कृपा हाथ पकड़कर बाहर निकालेगी .....

बापू के शब्द ~ मानस गंगोत्री 
जय सियाराम

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