शुक्रवार, 14 जून 2019

= सुन्दर पदावली(२३. राग मल्हार - ५/३) =

#daduji
॥ श्री दादूदयालवे नमः ॥ 
स्वामी सुन्दरदासजी महाराज कृत - *सुन्दर पदावली* 
साभार ~ महंत बजरंगदास शास्त्री जी, 
पूर्व प्राचार्य ~ श्री दादू आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(जयपुर) व राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(चिराणा, झुंझुनूं, राजस्थान) 
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*यह प्रकृति पुरुष मचाइ राष्यौ,*
*सदा करम हिंडोल ।* 
*सजि बिबिधि रूप बिकार भूषन,*
*पहरि अंगनि चोल ॥* 
*एक नृत्यत एक गावत,*
*मिलि परस्पर लोल ।* 
*रति ताल मदन मृदंग बाजत,*
*दुन्दु दुन्दुभि ढोल ॥३॥* 
इस प्रकार, प्रकृति एवं पुरुष – दोनों ने मिलकर यह कर्महिंडोला बना रखा है । इसमें विविध रुपविकारों के आभूषण शरीर पर पहन रखे हैं । यहाँ परस्पर मिल जुल कर कोई नाचता है तो कोई गाता है, रति(प्रेम) ताल देती है तो कामदेव मृदंग बजाता है । परस्पर का द्वन्द्व(वैर, द्वैतभाव) ही दुन्दुभि एवं ढोल आदि वाद्य(बाजे) हैं ॥३॥
(क्रमशः)

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