रविवार, 9 जून 2019

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🌷🙏🇮🇳 #daduji 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 卐 सत्यराम सा 卐 🇮🇳🙏🌷
*बातों सब कुछ कीजिये, अंत कछू नहिं देखै ।*
*मनसा वाचा कर्मना, तब लागै लेखै ॥*
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साभार ~ Atul Verma

सच में ही समय नहीं है? इतना दरिद्र आदमी पृथ्वी पर नहीं है, जिसके पास एक घंटा न हो, जो प्रभु को दिया जा सके। है ही नहीं ऐसा कोई आदमी। आठ घंटे हम नींद को दे देते हैं बिना कठिनाई के, बिना अड़चन के। अगर सारा हिसाब लगाने जाएं, तो अगर साठ साल आदमी जीए, तो बीस साल सोता है। और अगर हिसाब लगाएं, तो बाकी बीस साल दफ्तर जाना, घर आना, दाढ़ी बनाना, स्नान करना, भोजन करना, इनमें खो देता है। बाकी जो बीस साल बचते हैं, उनको समय काटने में लगाता है। समय काटने में, कि समय कैसे कटे !
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तो आप कोई जिंदगी काटने के लिए आए हुए हैं, कि किस तरह काट दें ! तो एकदम से ही काट डालिए। छलांग लगा जाइए किसी पहाड़ से, समय एकदम कट जाएगा। तो ये ग्रेजुअल स्युसाइड, ये धीरे-धीरे आत्महत्या को आप कहते हैं जीवन? यह रोज-रोज धीरे-धीरे काटने को?
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समय काटने का अर्थ है, जीवन को काट रहे हैं। क्योंकि समय जीवन है, और एक गया हुआ क्षण वापस नहीं लौटता। और आप कहते हैं, समय काटना है ! होटल में बैठकर काटेंगे। मित्रों से गपशप करके काटेंगे। और एक क्षण गया हुआ वापस नहीं लौटता। एक क्षण कटा हुआ पुनः नहीं मिलेगा। और एक क्षण कटा कि एक क्षण जीवन की रेत खिसक गई, जीवन कम हुआ।
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बड़ा मजेदार है आदमी। एक तरफ कहता है कि उम्र कैसे बढ़ जाए ! सारे पश्चिम में चिकित्सक लगे हैं खोजने में, उम्र कैसे बढ़ जाए ! उम्र बढ़ जाए, तो पूछता है, समय कैसे कटे ! क्या, कर क्या रहे हैं? चिकित्सक उम्र बढ़ाते चले जाते हैं और आदमी मनोरंजन के साधन खोजता है कि समय कैसे कटे !
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अब अमेरिका में बहुत चिंता है इस बात की। क्योंकि एक तरफ लोग मांग करते हैं कि काम के घंटे कम करो। घंटे कम हो गए हैं। कभी बारह घंटे थे; आठ घंटे हुए, छः घंटे हुए, पांच घंटे हुए। पांच घंटे काम के हो गए हैं। आदमी कहता है, और घंटे कम करो। काम कम। संभावना है कि जैसे ही सब आटोमैटिक हो जाए, यंत्रचालित हो जाए, तो समय और भी कम हो जाए। शायद आधा घंटा, घंटाभर एक आदमी काम कर आए, तो बहुत हो।

अब उस स्थिति में हम आ गए कि जब हमारी हजारों साल की आकांक्षा पूरी होती है कि हम काम से मुक्त होते हैं। करीब-करीब उस अवस्था में, जिसमें देवता अगर स्वर्ग में रहते होंगे, तो आदमी पहुंच गया। काम नहीं करना पड़ेगा। तो अब अमेरिका के सभी चिंतक परेशान हैं कि समय कैसे कटे ! समय को कैसे काटिएगा? काम तो काट दिया, अब समय को काटिए !

और डर इस बात का है कि काम से इतना नुकसान कभी नहीं हुआ था, जितना खाली समय बच जाएगा, तो हो जाने वाला है। क्योंकि खाली आदमी क्या करेगा? वह खाली आदमी उपद्रव करेगा। वह उपद्रव कर रहा है। इसलिए जितना समृद्ध समाज, उतना उपद्रवी, उतने हत्यारे, उतने डकैत, उतने चोर, उतने बेईमान पैदा कर देता है। उसका कारण है कि वे क्या करें? समय कहां काटें? खाली बैठे रहें?

लेकिन उन आदमियों से भी अगर कहो कि प्रभु-स्मरण एक घंटा, तो वे भी तत्काल उत्तर देते हैं–बिना सोचे यह उत्तर आता है–समय कहाँ?

इमर्सन से कोई पूछता था, तुम्हारी उम्र कितनी है? तो इमर्सन ने कहा कि तीन सौ साठ वर्ष ! अब इमर्सन, ईमानदार और सच्चा आदमी झूठ बोलेगा नहीं। जिसने पूछा, उसने समझा कि लगता है, मेरे सुनने में कोई भूल हो गई। उसने कहा, माफ करें। मैं ठीक से सुन नहीं पाया। कान पास लाया। इमर्सन ने जोर से कहा कि तीन सौ साठ वर्ष ! उस आदमी ने कहा कि आप मजाक तो नहीं कर रहे ! क्योंकि झूठ तो आप नहीं बोल सकते। मजाक तो नहीं कर रहे ! तीन सौ साठ ! ज्यादा से ज्यादा आप साठ साल के मालूम पड़ते हैं।
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इमर्सन ने कहा कि अच्छा, तो तुम दूसरे हिसाब से नाप रहे हो। हमारा हिसाब और है। साठ साल में आदमी जितना जीता है, हम उससे छः गुना ज्यादा जी चुके हैं। एक-एक क्षण का हमने छः गुना ज्यादा उपयोग किया है। हम उस हिसाब से कहते हैं, तीन सौ साठ साल। अगर तुम भी साठ साल के हो, तो हम तीन सौ साठ साल के हैं। क्योंकि तुमने किया क्या है? जीए कहां हो?
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तो वह आदमी पूछने लगा कि समझ लें कि आप छः गुना जी लिए। पा क्या लिया? और हम छः गुना कम जीए, तो क्या खो दिया? तो इमर्सन ने कहा, मेरी आंख में देखो, मुझे देखो, दो दिन मेरे पास रुक जाओ।
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वह आदमी दो दिन इमर्सन के पास था। फिर उसके पैर छूकर, माफी मांगकर गया कि भूल हो गई कि मैंने आपसे पूछा कि क्या पा लिया। आज मैं पहली दफा जीवन में जानकर जा रहा हूं कि मैंने साठ साल सिर्फ गंवाए हैं; कुछ पाया नहीं।
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दो दिन उसने देखी इमर्सन की शांति, देखी वह झील, जहां कोई एक रिपल, एक छोटी-सी तरंग भी नहीं उठती। देखा दो दिन इमर्सन के पास बैठकर कि उसके आस-पास शीतल विकिरण हो रहा है; उसके पास भी बैठकर जैसे स्नान हो जाता है। देखा इमर्सन के कमरे में सोकर और पाया कि सिर्फ इमर्सन के कमरे में सोने से भी उसके सपनों का गुणात्मक रूप बदल गया है; उसकी नींद की क्वालिटी बदल गई है। 
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इमर्सन के साथ जंगल में चलकर देखा कि जंगल वही नहीं मालूम होता है। इस जंगल में वह पहले भी निकला था, लेकिन वृक्ष इतने हरे न मालूम पड़े थे। और फूल इतने ताजे न मालूम पड़े थे। और फूल इतने खिले न दिखाई पड़े थे। और पक्षियों का गीत इस तरह सुनाई नहीं पड़ा था, जैसा इमर्सन के साथ सुनाई पड़ने लगा।
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एक शांत आदमी पास है, तो वह दूसरे को भी शांत करने की व्यवस्था जुटा देता है। दो दिन बाद वह क्षमा मांगकर लौटा। उसने कहा, मेरे साठ साल तो बेकार चले गए। अब जो थोड़े-बहुत दिन बचे हैं, क्या मैं कुछ पा सकता हूं?
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इमर्सन ने कहा कि अगर छः क्षण भी बचे हों, और तुम अपने साथ ईमानदार हो, तो उतना पा सकते हो, जितना तीन सौ साठ साल में मैंने पाया। लेकिन अपने साथ ईमानदार, टु बी आनेस्ट विद वनसेल्फ।
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दूसरे के साथ ईमानदार होना बहुत कठिन नहीं है। क्यों? उसी वजह से दूकानों पर लिखा हुआ है, आनेस्टी इज़ दि बेस्ट पालिसी। दूसरे के साथ ईमानदार होने में बहुत कठिनाई नहीं है। होशियार आदमी दूसरे के साथ ईमानदार होते हैं, क्योंकि दैट इज़ दि बेस्ट पालिसी। वही सबसे अच्छी तरकीब है। लेकिन अपने साथ ईमानदार होना एडवर्स है, वह सिर्फ योगी ही हो पाता है। लेकिन मैं आपसे कहता हूं, जो अपने साथ ईमानदार हो सके, वह चित्त उपराम को पा सकता है।

गीता-दर्शन भाग 3, अध्याय—6
OSHO

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