शनिवार, 13 जुलाई 2019

= सुन्दर पदावली(२४. राग काफी - ८/२) =

#daduji

॥ श्री दादूदयालवे नमः ॥ 
स्वामी सुन्दरदासजी महाराज कृत - *सुन्दर पदावली* 
साभार ~ महंत बजरंगदास शास्त्री जी, 
पूर्व प्राचार्य ~ श्री दादू आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(जयपुर) व राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(चिराणा, झुंझुनूं, राजस्थान) 
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*निस दिन नख शिख रोम रोम टेरैं ।* 
*पल पल छिन छिन नैंन मग हेरैं ॥२॥* 
*सोचि सोचि ससकत सास उसासा ।* 
*धषि धषि उठत रगत अरु मांसा ॥३॥* 
*बार बार सुन्दर बिरहनी सुनावै ।* 
*हाइ हाइ हाइ तुझ मिहर न आवै ॥४॥* 
यह दिन रात नख से शिखा तक अपने सभी अंगों से आप का नाम लेती रहती है तथा प्रतिक्षण आशा भरे नेत्रों से आप के आगमन की प्रतीक्षा करती रहती है ॥२॥ 
आपकी प्रतीक्षा करते करते इसके श्वास भर आते हैं । तथा इस शरीर के रक्त एवं मांस आपकी चिन्ता में जलते रहते हैं ॥३॥ 
महाराज श्रीसुन्दरदासजी कहते हैं – यह विरहणी बार बार आपसे प्रार्थना कर रही है । फिर भी आपको मुझ पर दया नहीं आती ! आप मुझको अब भी दर्शन क्यों नहीं देते ! ॥४॥
(क्रमशः)

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