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🌷🙏🇮🇳 卐 सत्यराम सा 卐 🇮🇳🙏🌷
*दादू जैसे श्रवणा दोइ हैं, ऐसे होंहि अपार ।*
*राम कथा रस पीजिये, दादू बारंबार ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ परिचय का अंग)*
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साभार ~ Tapasvi Ram Gopal
*कथा श्रवण से मोह शांत -*
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कथा श्रवण से होत है, मोह शांत सत जान ।
हुआ गरुड़जी का तरत, रामरूप पहचान ॥१९॥
लंका युद्ध के समय मेधनाथ ने जब श्री रामचन्द्र आदि को नागपाश में बांध लिया था तब नारदजी ने गरुड़जी को भेजा ।
गरुड़जी ने सब सर्पों को खा लिया । इससे मेधनाद की माया तो नष्ट हो गई किन्तु गरुड़जी को मोह(भ्रम) हो गया ।
*"यदि रामचन्द्र ईश्वर होते तो राक्षस की माया से कैसे बंध जाते ।"*
इस संशय की निवृति के लिये गरुड़जी ब्रह्माजी के पास गये । ब्रह्माजी ने शिवजी पास भेजा । शिव जी ने काकभुशुण्डि के पास भेजा । काकभुशुण्डि ने रामायण कथा सुनाई तब गरुड़जी का भ्रम दूर हुआ । इससे सूचित होता है कि कथा श्रवण से मोह शांत हो जाता है ।
###श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ### श्री नारायणदासजी पुष्कर अजमेर ###
######## सत्य राम सा

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