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*दादू कहै-*
*उठ रे प्राणी जाग जीव, अपना सजन संभाल ।*
*गाफिल नींद न कीजिये, आइ पहुंता काल ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ काल का अंग)*
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**श्री रज्जबवाणी**
टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥
साभार विद्युत् संस्करण ~ Tapasvi Ram Gopal
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*उपदेश चेतावनी का अंग ८२*
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रोग रहित मिनखा जनम, हरिसिद्धि१ घर ठाट ।
ता पर राम न सुमरिये, तो रज्जब भूल निराट२ ॥१५७॥
मनुष्य शरीर रोग रहित है, घर में लक्ष्मी१ का ठाट है, इतना होने पर भी राम का स्मरण नहीं करता है तो बड़ी२ ही भूल करता है ।
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चित्राम१ सकल बाजी चिहर२, भोला देख न भूल ।
बिच बाजीगर सत्य है, सो पकड़ी मन मूल ॥१५८॥
ईश्वर रूप बाजीगर की संसार रूप बाजी की रौनक२ चित्र१ के समान है, हे भोले जीव ! इसे देखकर भुलावे में मत पड़, इसके बीच में ईश्वर रूप बाजीगर सत्य है, उसी अपने मूल कारण को पकड़ अर्थात उसका भजन कर ।
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यह ठग बाजी ठग्ग की, ठग्या सकल संसार ।
तू रज्जब देखै हि जनि, जे न ठगावण हार ॥१५९॥
यह माया की ठगबाजी है, इसने सब संसार को ठगा है, यदि तू ठगाने वाला नहीं है तो इसकी और देख ही मत ।
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रज्जब अज्जब काम यहु, हरि सुमरो हित१ लाय ।
उलझ न अलि२ अल३ आसिरै, जो दीसै सो जाय ॥१६०॥
हरि से प्रेम१ लगाकर हरि का भजन कर, यही अदभुत कार्य है । हे जीव रूप भ्रमर२, माया३ के आश्रय मत फँस, जो भी मायिक संसार दीखता है सो सब नष्ट हो जायगा ।
(क्रमशः)

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