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🌷🙏🇮🇳 卐 सत्यराम सा 卐 🇮🇳🙏🌷
*दादू आपा उरझे उरझिया, दीसे सब संसार ।*
*आपा सुरझे सुरझिया, यह गुरु ज्ञान विचार ॥*
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साभार ~ Rp Tripathi
*सुंदर समाज निर्माण में हमारा योगदान :: १००% सफल उपाय*
“एक साधे सब सधें”... की कहावत को याद रखते हुए हमें सिर्फ़ एक कार्य करना है :—
“स्वयं के प्रति स्वयं पूरे ईमानदार रहते हुए, आज और अभी से; स्वयं से स्वयं को सुधारने का संकल्प लेना है ..!! स्वयं के सुधरते ही समाज में एक बुरा व्यक्ति तुरंत कम तथा एक अच्छा व्यक्ति तुरंत बढ़ जाता है ..!!
इतना ही नहीं;
जैंसे ही हम अच्छे होने के मार्ग पर चले; वैसे ही हमारी दृष्टि में एक बहुत ही मंगलकारी चमत्कारिक परिवर्तन घटित होता है ..!! हमें हमारे अच्छे पन के अनुपात में सम्पूर्ण संसार; ठीक उसी तरह अच्छा नज़र आने लगता है जिस तरह ...
एक ही स्त्री को यदि अनेक व्यक्ति देख रहे हों ? तो व्यक्ति को स्वयं के अंदर उपस्थित भाव के अनुरूप वह स्त्री दिखती है ..!!
अर्थात्;
स्वयं के अंदर पिता का भाव रखने वाला ही केवल उसमें; पुत्री देख पाता है ..!! स्वयं के अंदर भाई का भाव रखने वाला ही केवल उसमें; बहिन देख पाता है ..!! स्वयं के अंदर पुत्र का भाव रखने वाला ही केवल उसमें; माँ देख पाता है ..!! स्वयं के अंदर पति का भाव रखने वाला ही केवल उसमें; पत्नी देख पाता है ..!! स्वयं के अंदर प्रेमी का भाव रखने वाला ही केवल उसमें; प्रेमिका देख पाता है ..!! स्वयं के अंदर आसुरी भाव रखने वाला ही केवल उसमें; कुल्टा देख पाता है .. !! स्वयं के अंदर देवत्व का भाव रखने वाला ही केवल उसमें; देवी देख पाता है ..!! आदि आदि ..!!
दूसरे शब्दों में;
“हमारे एक के सुधरने से सम्पूर्ण संसार सुधर जाता है ..!!”
उपरोक्त से सहमत हैं ना सम्मानित मित्रों ?
** ॐ कृष्णम वंदे जगत् गुरुम **

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