🌷🙏🇮🇳 #daduji 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 卐 सत्यराम सा 卐 🇮🇳🙏🌷
*दादू पड़दा पलक का, येता अन्तर होइ ।*
*दादू विरही राम बिन, क्यों कर जीवै सोइ ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ विरह का अंग)*
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साभार ~ Tapasvi Ram Gopal
*ईश्वर नाम बिन भक्त देह भी नहीं रखते -*
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भक्त नाम बिन देह भी, रख सकते है नांहिं ।
तनमन अन्तर्निष्ठि नृप, मिले ईश के माँही ॥७०॥
एक अन्तर्निष्ठी नामक भक्त राजा थे । उसकी रानी भी भगवत् भक्त थी । उसने राजा के मुख से कभी भी ईश्वर नाम नहीं सुना था । इससे उसे बड़ा दुख था ।
एक दिन रात्रि में सोये हुये राजा के मुख से करवट बदलते समय "राम" ऐसा निकल पड़ा । रानी ने यह सुनकर प्रात: बड़ा भारी उत्सव मनाया । राजा ने पुछा - आज यह उत्सव किस बात का है ?
रानी "आपके मुख से आज राम नाम निकला है, इसलिये यह उत्सव मनाया गया है ।"
राजा - यदि राम नाम निकल गया तब तो जीवित रहना ही बेकार है । यह कह कर तत्काल शरीर त्याग के राजा भगवत् स्वरूप में जा मिले थे । इससे सूचित होता है कि श्रेष्ठ भक्त ईश्वर नाम बिना देह भी नहीं रखते ।
### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ##
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
######## सत्य राम सा

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