सोमवार, 30 सितंबर 2019

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🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🇮🇳🙏🌷
*सब घट एकै आत्मा, जानै सो नीका ।*
*आपा पर में चीन्ह ले, दर्शन है पीव का ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ दया निर्वैरता का अंग)*
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साभार ~ Tapasvi Ram Gopal
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ##भाग २ ##दया*
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संत रज्जबजी अपने साथ रहने वाले कुछ संतों के साथ एक भक्त के घर भोजन करने जा रहे थे । मार्ग में एक अति दीन गरीब व्यक्ति ने प्रार्थना की, कि - भगवन मुझे भी भोजन कराने ले चले । रज्जबजी ने उसे साथ ले लिया, उसके वस्त्र आदि मलीन होने से सब लोगों ने कहा - इसे पंक्ति से बाहर ही बैठाना चाहिये, किन्तु रज्जबजी ने यह सोच करके कि - दूर बैठाने से यह लोग इसे ठीक तृप्त करके नही जिमा सकेंगे, अपने पास ही बिठाया । सबके आग्रह करने पर भी रज्जबजी ने उनकी एक भी बात न सुनी ।
उसे अपने पास बैठा करके अपने हाथों से बड़े प्रेम से जिमाया । संत की यही विशेषता प्रमुख है ।
दया करन में दयालु को, भय प्रतिपक्ष न होय ।
पास बिठाया दीन को, रज्जब सुनी न कोय ॥१४५॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ###
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
### सत्यराम सा ###

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