#daduji
॥ श्री दादूदयालवे नमः ॥
स्वामी सुन्दरदासजी महाराज कृत - *सुन्दर पदावली*
साभार ~ महंत बजरंगदास शास्त्री जी,
पूर्व प्राचार्य ~ श्री दादू आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(जयपुर) व राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(चिराणा, झुंझुनूं, राजस्थान)
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*= २७. राग धनाश्री - ७/२ =*
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*बीति गये दिन बहुत ही अंतरजामी राइ ।*
*कै तुम आवौ आपतैं कै तुम लेहु बुलाइ ॥३॥*
*अबतौ ऐसी क्यौं बनैं प्यारे प्रीतम लाल ।*
*सुन्दर बिरहनि यौं कहै दरसन देहु दयाल ॥४॥*
हे अन्तर्यामिन् ! बहुत समय बीत गया । अब मुझे लेने के लिये आप स्वयं आइये, या किसी को भेजकर मुझको अपने पास बुला लीजिये ॥३॥
हे मेरे प्रिय प्रियतम ! अब यह स्थित कैसे बने ? महात्मा सुन्दरदासजी कहते हैं – हे दयालु ! अब तो इस विरहिणी को आप ही आकर दर्शन दें ॥४॥
(क्रमशः)

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