🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🇮🇳🙏🌷
*दादू निरंतर पीव पाइया, तहँ पंखी उनमनि जाइ ।*
*सप्तों मंडल भेदिया, अष्टैं रह्या समाइ ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ परिचय का अंग)*
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साभार ~ Tapasvi Ram Gopal
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माया प्रेमी ईश तक पहुंच, सकत है नांहि ।
सार खण्ड में सब रहे, एकहि कष्टमय मांहि ॥९॥
एक राजा के पुत्र न था, उसने सोचा - मुझे परलोक साधन अवश्य करना है किन्तु राज्य किसे दूं ? फिर कुछ सोचकर एक सुन्दर बाग में अष्टखण्ड का महल बनाकर विचित्र-विचित्र नाना वस्तुओं से उसके सात खण्ड तथा बाग को सजाकर नगर में डोंडी फिरवा दी कि 'कल आठ बजे से बारह बजे तक जो राजा के पास आठवें खण्ड में चला जायगा उसे ही राज्य मिलेगा ।'
सब को राज्य प्राप्ति की इच्छा थी किन्तु सब सात खण्डों की विचित्र वस्तुओं को देखने में ही रह गये, एक व्यक्ति राजा के पास पहुंचा ।
राजा ने पूछा - "तुम सातों खण्डों की विचित्रता देख आये ?"
वह बोला- "जब मुझे राज्य मिल जाएगा, तब वे सब तो मेरे ही हो जायेंगे जब इच्छा होगी तब ही देख लूंगा ।"
ऐसे ही जो माया के सप्त मण्डल में नही फंसता वही ईश्वर रूप राजा के पास पहुंचकर आत्मस्वराज्य प्राप्त करता है । अन्य सब मायिक प्रपंच मे ही भटकते हैं ।
### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ###
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
### सत्य राम सा ###

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