शुक्रवार, 20 सितंबर 2019

= सुन्दर पदावली(२७. राग धनाश्री - ६/२) =

#daduji
॥ श्री दादूदयालवे नमः ॥ 
स्वामी सुन्दरदासजी महाराज कृत - *सुन्दर पदावली* 
साभार ~ महंत बजरंगदास शास्त्री जी, 
पूर्व प्राचार्य ~ श्री दादू आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(जयपुर) व राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(चिराणा, झुंझुनूं, राजस्थान) 
*= २७. राग धनाश्री - ६/२ =*
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*मैं अबला अति ही दुषी तुम सम्रथ सब बात ।*
*जब सुदृष्टि करि देषिहौ तब मेरै कुसरात ॥३॥*
*मै चातक पिय पिय करौं तुम जलधर जलदांनि ।*
*सुन्दर बिरहनि यौं कहैं प्यास बुझावौ आंनि ॥४॥*
मैं अबला(निर्बल) इस समय बहुत ही दु:खी हूँ । तथा आप सर्वथा समर्थ हैं । जब आप मुझको दया की दृष्टि से देखोगे तभी मेरा निश्चित कुशल(सुख) होगा ॥३॥
मैं आपके विरह में चातक के समान ‘पीव पीव’ कर रही हूँ । आप को भी मेघ के समान बन कर जल देने की कृपा करनी चाहिये । महात्मा सुन्दरदासजी कहते हैं – आपके बिना मुझ विरहणी की प्यास कौन आकर बुझाएगा ॥४॥
(क्रमशः)

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