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🌷🙏🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🇮🇳🙏🌷
*घर वन मांहीं राखिये, दीपक जलता होइ ।*
*दादू प्राण पतंग सब, आइ मिलैं सब कोइ ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ साधु का अंग)*
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साभार ~ Tapasvi Ram Gopal
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साधुसेवी के आप ही, आते संत अनन्त ।
विष्णुदास गोपाल के, आये महान सन्त ॥३४८॥
विष्णुदास काश्मीर से और गोपाल काशी के समीप के रहने वाले थे । दोनों गुरु भाई थे । साधु सेवा के द्वारा ये प्रसिद्ध हो गये थे । कोई उन्हें महोत्सव आदि में बुलवाता तब वे खाद्य सामग्री की गाड़ी भरके ले जाते थे, क्यों कि वहां साधु सेवा में किसी वस्तु की कमी न आवे । एक समय दोनों ने अपने गुरु से कहा- "आपकी आज्ञा हो तो एक महोत्सव मनावें ।"
गुरु ने आज्ञा दे दी और संतों को बुलाने के लिये अपने चारों ओर जल डाल करके कहा - तुम सामान तैयार करो, निमंत्रण देकर संतों को बुलाने की आवश्यकता नहीं । सब संत महोत्सव पर आप पधार जायेंगे । वैसा ही हुआ । बिना बुलाये ही बड़े -बड़े संत भी वहां पधारे ।
पांच दिन तक महोत्सव मनाया गया, सबको वस्त्र आदि भेंट दिया गया उनके गुरु बड़े सिद्ध पुरुष थे उनने कहा - देखो वे नामदेव और कबीर है । यह सुनकर दोनों गुरुभाई दौड़कर दोनों संतों के चरणों में जा गिरे । दोनों संतों ने कहा - तुम्हारी साधू सेवा प्रशंसनीय है । तथा तुम्हारी संत-सेवा से प्रसन्न होकर ही हम तथा अन्य सब संत बिना बुलाये भी अपने आप यहां आये आये हैं ।
इससे सूचित होता है कि संतसेवा में बड़े बड़े सन्तजन भी स्वयं आते हैं ।
### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ###
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
### सत्य राम सा ###

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