शुक्रवार, 20 सितंबर 2019

= ४७ =

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🇮🇳🙏🌷
*दादू गुण तजि निर्गुण बोलिये, तेता बोल अबोल ।*
*गुण गहि आपा बोलिये, तेता कहिये बोल ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ शब्द का अंग)*
====================
साभार ~ Tapasvi Ram Gopal
.
*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ##भाग २ ##अहिंसा*
#############################
संत अहिंसक पास में, वैर रहै लव नांहि ।
तेजानंद बैल सिंह, रहें एक थल मांहि ॥१११॥
जोधपुर के पास संत दादूजी के शिष्य संत तेजानंदजी के आश्रम के समीप में बहुत थक जाने से एक बनजारे ने अपना बैल छोड़ दिया था ।
वहां का हरा धास खाने से वह मोटा ताजा हो गया और वहीं रहने लगा । एक दिन उस वन में एक सिंह आया और बैल पर झपटा ।
बैल तेजानंदजी की ओर भागा, संत बैल के पिछे आते हुऐ सिंह को कहा - "ठहर जाओ" सिंह सहसा ठहर गया, फिर उसे उपदेश देकर कहाँ - यह बैल तुम्हारा गुरु भाई है, अब इसे नहीं मारना ।
फिर तो सहज बैर को भूलकर वे एक साथ रहने लगे । कहा भी है -
"बाघ वृषभ दो एकठे, अवलोकत आनन्द ।
सामिल तिता चराइया, बाबे तेतानन्द ॥"
### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ###
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
### सत्य राम सा ###

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें