🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🇮🇳🙏🌷
*दादू भोजन दीजे देह को, लिया मन विश्राम ।*
*साधु के मुख मेलिये, पाया आतमराम ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ साधु का अंग)*
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साभार ~ Tapasvi Ram Gopal
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गैब मांहि गुरु देव मिले, पाया हम परसाद ।
मस्तक मेरे कर धरा, देखा अगम अगाध ॥
वृद्ध रूप भगवान भी दादूजी को राजस्थान में जाकर भक्ति प्रचार की आज्ञा देकर अन्तर्धान हो गये । एक पैसा प्रदान मात्र से ही दादूजी पर ईश्वर की कृपा हुई ।
आदि शब्द से रोटी का ग्रहण है - तिमिंगल नामक एक बालक गौएँ चरा रहा था । उधर होकर एक संत निकले, बालक ने उन्हें प्रणाम करके कहा - 'अभी मेरी माँ रोटी लेकर आयेगी, आप भोजन करके पधारना ।' संत - तेरी माँ तेरे लिये लायेगी मेरे लिये तो नहीं ? बालक - यह तो ठीक है किन्तु आपके प्रथम भोजन करने से वह मेरे लिये ले आयेगी ।
संत ने बालक की बात मान ली, रोटी आने पर भोजन करके बालक को डन्डे मारने लगे । बालक की माँ ने कहा - "भगवन कोई त्रुटि हुई हो तो क्षमा करे, यह अबोध बालक है, किन्तु संत ने कुछ नही सुना, सात डंडे मार ही दिये । फिर माता - पुत्र गिर पड़ी तब संत चुपचाप चले गये । रोटी देने का पुण्य के प्रताप से संत ने सात डण्डे मारने के संकेत से सात बार राजा होने का वर दिया था ।
संत गरीबदासजी ने कहा भी है -
'तिमंगरू ने रोटी दीन्ही, ताते सात बादशाही लीन्हीं"
देखो सुपात्र को एक रोटी देने पर सात जन्म तक तिमंग राजा होता है ।
संत रज्जब जी ने भी कहा है -
"रोटी कौपी दोवटी, तन्दुल पैसा रोक ।
जन रज्जब से ऊबरे, जिन बाह्या हरि की ओक ।"
### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ###
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
### सत्य राम सा ###

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