बुधवार, 9 अक्टूबर 2019

= सुन्दर पदावली(फुटकर काव्य १.चौबोला - ११.१२) =


#daduji
॥ श्री दादूदयालवे नमः ॥
स्वामी सुन्दरदासजी महाराज कृत - *सुन्दर पदावली*
साभार ~ महंत बजरंगदास शास्त्री जी,
पूर्व प्राचार्य ~ श्री दादू आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(जयपुर) व राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(चिराणा, झुंझुनूं, राजस्थान)
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*= फुटकर काव्य १.चौबोला - ११.१२ =*
*दुवा तिहारी लेतही कलमष रहे न कोइ ।* 
*काग दशा सब मिटि गई लेष कर्म यौं होइ ॥११॥* 
आपका शुभ आशीर्वाद मिलते ही मेरे सभी पाप निवृत्त हो गये । इस कारण अब मेरी पापमय दशा(कर्म लिखा भाग्य का भोग) भी समाप्त हो गयी । तथा दौर्भाग्य(कर्म) का लेख भी नष्ट हो गया ॥११॥ (इस पद में दुवात, कलम, कागद एवं लेखक – ये चार शब्द गुप्त हैं ।) 
*मारूँ मन कौं पटकि कैं के डरा सूं प्रीति ।* 
*नट बाजी भूलौं नहीं भैरव राषौं जीति ॥१२॥* 
मैं अपने मन को नीचे पटक कर, पीट पीट कर इसलिये मारूँगा कि इसने परायी स्त्रियों से प्रेम क्यों किया । मैं इसको समझाऊँगा कि भैरव के समान बलवान् अपने को जीतकर प्रभु में लग जाओ ॥१२॥(इस पद में राग मारू, केदारा, नटनारायण एवं भैरव रागों के ये चार नाम निकलते हैं ।)
(क्रमशः)

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