#daduji
॥ श्री दादूदयालवे नमः ॥
स्वामी सुन्दरदासजी महाराज कृत - *सुन्दर पदावली*
साभार ~ महंत बजरंगदास शास्त्री जी,
पूर्व प्राचार्य ~ श्री दादू आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(जयपुर) व राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(चिराणा, झुंझुनूं, राजस्थान)
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*= फुटकर काव्य २.गूढार्थ - ११/१२ =*
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*मिश्री निद्रा पंडसुत चतु रक्षर त्रय नांम ।*
*पीयें आयें अरु मिलें सुख ह्वैं आठौं जांम ॥११॥*
मिश्री, निद्रा एवं पाण्डु सुत – इन तीन नामों में से – मिश्री के पीने से मुख का माधुर्य, निद्रा के सुखपूर्वक आने से, पाण्डुसुतों के नामोच्चारण से स्थिर सुख मिलता है – ऐसा लोक में प्रसिद्ध है) ॥११॥
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*ॠषी करण बसुदेव सुत इनके अर्थ हिं जांनि ।*
*तीन नाम तिनमैं प्रगट चतुअक्षर पहिचांनि ॥१२॥*
ॠषि, करण एवं वसुदेवसुत – इनके अर्थ भी जान लो । (इस ज्ञान से भी सुख मिलता है – ऐसा लोक में प्रसिद्ध है) ॥१२॥
(क्रमशः)

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