मंगलवार, 8 अक्टूबर 2019

= सुन्दर पदावली(फुटकर काव्य १.चौबोला - ९.१०) =

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॥ श्री दादूदयालवे नमः ॥
स्वामी सुन्दरदासजी महाराज कृत - *सुन्दर पदावली*
साभार ~ महंत बजरंगदास शास्त्री जी,
पूर्व प्राचार्य ~ श्री दादू आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(जयपुर) व राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(चिराणा, झुंझुनूं, राजस्थान)
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*= फुटकर काव्य १.चौबोला - ९.१० =*
*गौरी मेरौ पीव तजि पर्यौ कानरा बोल ।* 
*कैसें होत कल्यान अब रूठौ नाह हिंडोल ॥९॥* 
हे गौरि ! मेरा पति मुझ को छोड़ गया – ऐसा मैंने लोगों से कानों कान सुना है । अब मेरा कल्याण कैसे होगा ? क्या मेरे सुख के दिन बीत गये कि मेरा पति मुझसे अप्रसन्न हो गया ! ॥ (इस पद में गौरी, कानड़ा, कल्याण एवं हिंडोल रागों के नाम निकलते हैं) ॥९॥ 
*सूहौ मुहि सांई करी धना सीस सिरताज ।* 
*आशा पुरइ जीव की राम गरीब निवाज ॥१०॥* 
अब मेरे लिए प्रभु ने यह उचित(सूही) ही किया । मैं धन्य(धना) हो गया कि आज मैं सबसे उत्तम(सिरताज) मान लिया गया हूँ । उन दीन दयालु भगवान् ने मेरे हृदय की इच्छा पूर्ण कर दी है ॥१०॥ (इस पद्य में सूहा, धनाश्री, आशा, पुर्वीराग एवं रामकली राग के नाम निकलते हैं ॥)
(क्रमशः)

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