बुधवार, 9 अक्टूबर 2019

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🌷🙏🇮🇳 #daduji 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 卐 सत्यराम सा 卐 🇮🇳🙏🌷
*दादू सगुणा गुण करै, निगुणा मानै नांहि ।*
*निगुणा मर निष्फल गया, सगुणा साहिब मांहि ॥*
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साभार ~ Tapasvi Ram Gopal

सांच का सबद सोना का रेख ।
निगुरां क चाणक सगुरा कों उपदेश ॥
गुरु का मुंडया गुंण में रहै,
निगुरा भ्रमै ओगुण गहै ॥१४९॥
जिस प्रकार खरे सोने को किसी भी कसौटी पर कभी भी परखा जाय तो खरा ही रहता है, उसी प्रकार सत्य वचन हमेशा सत्य और खरे होते हैं । ठीक यही स्थिति, सद्गुरु के वचनों में विश्वास करने वाले समझदार और सावधान शिष्य की होती है । वह सदा सर्वदा मर्यादा में ही रहता है, जबकी निगुरा(चालाक और धूर्त) भ्रमित होकर सद्गुण के स्थान पर अवगुण ग्रहण करना ही अपनी उपलब्धि मानता है ।
### संस्कार बिन्दु पत्रिका साँभरलेक जयपुर से ###
*****सत्यराम सा*****

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