🌷🙏🇮🇳 #daduji 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 卐 सत्यराम सा 卐 🇮🇳🙏🌷
*साधु नदी जल राम रस, तहाँ पखाले अंग ।*
*दादू निर्मल मल गया, साधु जन के संग ॥*
====================
साभार ~ Ramji(*।ॐसनातन धर्म एक ही धर्म* wtsap)
🌸🌞🌸🌞🌸🌞🌸🌞🌸🌞🌸
‼ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼
🔴 *आज का सांध्य संदेश* 🔴
🌻☘🌻☘🌻☘🌻☘🌻☘🌻
*सनातन धर्म में प्रभु प्राप्ति के कई साधन बताये गये हैं ! जैसे कि - जप, तप, पूजा, पाठ, सतसंग आदि | कभी कभी मनुष्य दिग्भ्रमित हो जाता है कि वह प्रभु को प्राप्त करने के लिए कौन सा मार्ग चुने | प्राचीनकाल की कथाओं को पढकर ऐसा लगता है कि सबसे महत्तपूर्ण साधन जप एवं तप ही रहे होंगे | परंतु किसी भी जप या तप से अधिक श्रेष्ठ व सरल साधन है सतसंग करना | बिना सतसंग किये न तो ईश्वर के विषय में जाना जा सकता है और न ही किसी भी जप या तप के विषय में |*
.
*सतसंग की श्रेष्ठता को स्वयं मर्यादापुरुषोत्तम श्रीराम माता शबरी को नवधा भक्ति की शिक्षा देते हुए प्रतिपादित करते हैं | नव प्रकार की भक्ति में प्रथम भक्ति सतसंग को ही बताते हुए स्वयं श्रीराम प्रभु के माध्यम से गोस्वामी तुलसीदास जी लिखते हैं - "प्रथम भगति संतन कर संगा !" वहीं दूसरी ओर वेदव्यास जी भी श्रीमद्भागवतम् में भक्त प्रहलाद के माध्यम से प्रथम भक्ति "श्रवणं" ही बताते हैं | श्रवणं का अर्थ हुआ प्रभु की लीलाओं को श्रवण करना | प्रभु की लीलाओं का रसास्वादन करने के लिए सतसंग की ही शरण लेनी पड़ेगी |*
.
*कहने का तात्पर्य यह है कि - जब तक हम प्रबुद्ध ज्ञानियों की संगत नहीं करेंगे तब तक पूजा, पाठ, जप, तप, आराधना के विषय में जानेंगे कैसे ?? अत: सतसंग ही प्रभु प्राप्ति की प्रथम सीढी होने के साथ ही श्रेष्ठ भी है | सतसंग से ही मनुष्य में भगवान का दर्शन करने या प्राप्त करने की इच्छायें प्रबल होती हैं और वह जप एवं तपस्या की ओर अग्रसर होता है |*
*आज के आधुनिक युग में जिस प्रकार लोग अपने वेद पुराणों का अध्ययन गूगल आदि पर ही करके विद्वान बनते जा रहे हैं, बड़े बड़े यज्ञ, भगवत्कथादि का आयोजन हो रहा है उसकी अपेक्षा लोगों को फल नहीं मिल रहा है | आखिर ऐसा क्यों ??? इसका एक ही कारण है कि लोग सतसंग से विमुख हो रहे हैं | सतसंग न करके लोग सिर्फ किताब(ग्रंथ) पढकर ही सबकुछ पा जाना चाहते हैं जो कि सम्भव नहीं है |*
.
*जब बच्चे को पहली बार विद्यालय में प्रवेश कराना होता है तो उसके एक महीने पहले से ही परिवार के लोगों के द्वारा बच्चे के मस्तिष्क में विद्यालय एवं वहाँ के विषय में सकारात्मक बातें आरोपित की जाती हैं |*
.
*तब बच्चा परिवार का त्याग करके विद्यालय जाने के योग्य होता है | परिवार के लोगों द्वारा विद्यालय के विषय में जो बात(सतसंग) बच्चे से की जाती है उसको सुनकर(श्रवणं) बच्चा स्वयं को विद्यालय के लिए तैयार करता है | मेरा मानना है कि यदि किसी भवन के छत पर पहुँचना है तो मनुष्य को सीढी का प्रयोग करते हुए एक एक पायदान चढकर ऊपर पहुँचना होगा |*
.
*भगवत्प्राप्ति रूपी छत के सीढी का पहला पायदान है सतसंग, बिना उस पर चढे किसी को कुछ(लक्ष्य) नहीं प्राप्त हो सकता | यदि उच्च शिक्षा की आकांक्षा है तो मनुष्य को प्राईमरी(प्राथमिक शिक्षा) मे प्रवेश लेनालही पड़ेगा, क्योंकि सीधे आप शास्त्री, आचार्य, चिकित्सक या अधिवक्ता नहीं बन सकते | उसी प्रकार भगवत्मार्ग में उच्चता प्राप्त करने आकांक्षा है तो सतसंग करना पड़ेगा क्योंकि भगवत्प्राप्ति की प्राईमरी है सतसंग |*
*भगवान के सभी नामों में जिस प्रकार श्री राम नाम सर्वश्रेष्ठ है, उसी प्रकार भगवत्प्राप्ति के साधनों में "सतसंग" ही सर्वश्रेष्ठ है | अत: सतसंग करते रहना चाहिए |*
🌺💥🌺 जय श्री हरि 🌺💥🌺
🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥
*सभी भगवत्प्रेमी*----🙏🙏🌹
♻🏵♻🏵♻🏵♻🏵♻🏵♻
🙏🌹जय श्री हरि🌹🙏
🍀🌟🍀🌟🍀🌟🍀🌟🍀🌟🍀

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें