मंगलवार, 17 दिसंबर 2019

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*राम जपै रुचि साधु को, साधु जपै रुचि राम ।* 
*दादू दोनों एक टग, यहु आरम्भ यहु काम ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ परिचय का अंग)*
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साभार ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी​ 
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु* *भाग ३* *सौहार्द भक्ति*
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जनकपुर निवासी स्वामी रामप्रसादजी भगवान् रामचन्द्रजी को अपना दामाद मानते थे । जब वे रामजी के दर्शन करने अयोध्या गये तब वहां का पानी भी नहीं पीया । मंदिर में पहुंचने पर उसके भाव के अनुसार रामजी की मूर्ति ने सिंहासन से उठकर ससुर के समान उनका स्वागत किया था । इससे सूचित होता है कि सौहार्द भाव के भक्तों के भाव के अनुसार ही भगवान उनसे व्यवहार करते हैं ।
सुहृद भक्त से हरि करे, भाव तुल्य व्यवहार ।
कीन्हा रामप्रसाद से, करके भलि विधि प्यार॥२६४॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
### सत्यराम सा ###

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