मंगलवार, 18 फ़रवरी 2020

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*साधु शिरोमणि शोध ले, नदी पूर पर आइ ।*
*संजीवनि साम्हा चढै, दूजा बहिया जाइ ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ साधु का अंग)*
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साभार ~ महन्त Ram Gopal तपस्वी 
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु,* *सेवा*
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दादूपंथी संत रधुनाथदासजी प्राय: जयपुर रहा करते थे । उनका साधुसेवा में बड़ा प्रेम था । वे साधारण लोग जो अपने रोग नाश के लिये तन्त्र मंत्र वालों के तथा अपनी कामना पूर्ति के लिये पीरादि के पास भटक-भटक कर दु:ख उठाते थे, उन्हें साधुसेवा करने उनके कार्य होने का विश्वास दिलाकर तथा विविध प्रकार से साधुसेवा द्वारा दुख:नाश तथा कामना पूर्ति का भेव(रहस्य) बतला करके साधुसेवा करवाते थे । 
साधु सेवा से ही उनके सब कार्य हो जाया करते थे । किसी से वे दादूवाणी का अखण्ड पाठ करवाकर और किसी से जागरण करवा करके भोजनादि से साधु-सेवा करवाते रहते थे । आप बड़े संयमी थे, एक कोपीन और एक चद्दर ही रखते थे । साधुसेवा से सब कामना पूर्ति का उपदेश करके लोगों को साधुसेवा और भगवान भक्ति में लगाते थे । इससे सूचित होता है कि साधु-सेवी नाना भांति से साधुसेवा करवाते हैं ।
साधुसेवी करवाता है, बहुत भांति से सेव ।
करवाते रधुनाथदास, बता विविध विधि भेव ॥३४०॥ 
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
^^^^^^^//सत्य राम सा//^^^^^^^

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