शनिवार, 29 फ़रवरी 2020

= १५३ =

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🇮🇳🙏🌷
*दादू साचा साहिब सेविये, साची सेवा होइ ।*
*साचा दर्शन पाइये, साचा सेवक सोइ ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ साँच का अंग)*
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साभार ~ महन्त Ram Gopal तपस्वी
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु,* *अतिथि*
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दामोदर ब्राह्मण कांचीपुरी में रहा करते थे । सन्तान नहीं थी । पति-पत्नी दो ही थे । भिक्षा से निर्वाह करते थे और आये हुए अतिथि का भी उसी से सत्कार करते थे । एक दिन भगवान् वृद्ध(बूढा) विप्र रूप में अतिथि हुये । उस रोज दामोदर को भिक्षा भी न मिली थी, दोनों भूखे थे । अतिथि की बड़ी चिन्ता हुई । पत्नी ने अपने सिर के केश काटकर डोरी बना, पति के हाथ बाजार में बिकवा के अन्न मँगाकर अतिथि को भोजन दिया था । इससे प्रसन्न हो भगवान् ने उन्हें उसी रात्रि में धनाढय बना दिया तथा स्त्री के केश भी पूर्ववत कर दिये थे ।
अतिथिन हित घर भक्त के, कुछ न अदेय सुजान ।
दामोदर तिय काट कच, अन्न दिया सुख भान ॥२०॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
^^^^^^^//सत्य राम सा//^^^^^^^

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