🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🇮🇳🙏🌷
*सो धक्का सुनहाँ को देवै, घर बाहर काढै ।*
*दादू सेवक राम का, दरबार न छाड़ै ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ निष्काम पतिव्रता का अंग)*
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साभार ~ महन्त Ram Gopal तपस्वी
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु,* *सेवा*
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एक साधुसेवी राजा की पुत्री चन्द्रकान्ता का विवाह अभक्त राजा के साथ हो गया । जब वह सुसराल में आ गई तब उसे सतसंग छोड़कर साधु दर्शन भी दुर्लभ हो गया । उसने अपनी दासी से कहा - "तू जब साधुओं को देखे तब मुझे कहना ।" एक दिन दासी ने कहा - "आज अमुक बाग में साधुओं की मंडली आई है ।" यह सुनकर उसने अपने दो-तीन बर्ष के बालक को विष दे दिया । पुत्र की मृत्यु से राजा रोने लगा । रानी ने कहा- "मेरा पीहर का अनुभव है कि सन्तों के चरणामृत से बालक अवश्य जीवत हो जाय । राजा - संत किसे कहते है ? रानी - यह दासी बतायेगी ।
दासी राजा को मण्डलेश्वर के पास ले गई । राजा अनुनय विनय करके उन्हें ले आया । रानी ने संतों के दर्शन किये और उनके चरण धोकर चरणामृत लड़के के मुख में डाल भगवान से प्रार्थना की, लड़का जीवित हो गया । इससे राजा और प्रजा सब भक्त हो गये और रानी को सत्संग परम सुलभ हो गया । इससे सूचित होता है कि सन्तसेवी सत्संग के लिये महान क्लेश भी अपना लेते हैं ।
साधुसेवि सत्संग हित, महाक्लेश भी लेय ।
संतसंग किया एक ने, सुत को भी विष देय ॥३५४॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
^^^^^^^//सत्य राम सा//^^^^^^^

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