शनिवार, 22 फ़रवरी 2020

= १३९ =

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🇮🇳🙏🌷
*सेवक बिसरै आप कौं, सेवा बिसरि न जाइ ।*
*दादू पूछै राम कौं, सो तत्त कहि समझाइ ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ परिचय का अंग)*
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साभार ~ महन्त Ram Gopal तपस्वी
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु,* *ईश्वर*
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अपाला अत्रि ऋषि की पुत्री और दत्तात्रेय की बहिन थी उसको कोढ हो गया था, इससे उसके पति ने त्याग दिया था । वह पिता के आश्रम के एक कोने में कुटिया बनाकर इन्द्र(ईश्वर) की उपासना करने लगी । इन्द्र के साथ उसका प्रेम हुआ । तथा इन्द्र का भी उससे बहुत प्रेम हो गया । एक दिन अपाला एक तालाब पर जल का घड़ा भरने जा रही थी । 
मार्ग में एक सोमवल्ली दिखाई पड़ी । इन्द्र को सोमरस पिलाने का विचार करके अन्य साधन न होने से दांतों से सोमरस निकालकर उससे अपना मुख भर के इन्द्र को पुकारा । तत्काल इन्द्र आ गये, अपाला ने कहा लो सोमरस पिओ । इन्द्र ने वह मुख का रस पी लिया । फिर इन्द्र को कुटिया पर ले गई और सत्तू तथा बासी पूआ खिलाया । इन्द्र को उसके कोढ से कुछ भी धृणा नहीं हुई थी, इससे सिद्ध होता है कि ईश्वर को भक्त के देह से धृणा नहीं होती ।
भक्तन के तन दोष से, धृणा न करते राम ।
सोम अपाला वदन का, पी पाया विश्राम ॥१२॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
^^^^^^^//सत्य राम सा//^^^^^^^

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